उज्जैन, 3 नवंबर (आईएएनएस)। महाकाल की नगरी उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन हुए।
इसके बाद पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के बाद बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।
महाकाल का रजत चंद्र-त्रिशूल-त्रिपुंड और ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार किया गया। झांझ-मंजीरे और डमरू की ध्वनि से बाबा की आरती की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध थे।
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा महाकाल की इस अद्भुत आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं और दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करते हैं।
–आईएएनएस
एसडी/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



