बेंगलुरु, 1 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को घोषणा की कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़े छात्रों को इंजीनियरिंग और मेडिकल पाठ्यक्रमों सहित व्यावसायिक शिक्षा में 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
शिवकुमार ने सदाशिवनगर स्थित अपने आवास और विधान सौधा में भुवनेश्वरी देवी की प्रतिमा के पास मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि प्रत्येक मतदाता के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, और यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
कांतिरवा स्टेडियम में 71वें कन्नड़ राज्योत्सव समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आरक्षण ग्रामीण सरकारी स्कूलों के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से है।
शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत स्तर पर विद्यालयों को शहरी विद्यालयों के मानकों के अनुरूप ढालने का काम कर रही है। 15,000 शिक्षकों की भर्ती के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जबकि कर्नाटक भर में 25,498 द्विभाषी विद्यालय शुरू किए जा चुके हैं। 250 सरकारी विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जा चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कक्षा 6 से कौशल आधारित शिक्षा शुरू की गई है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण कक्षा 6 से ही विद्यार्थियों को दिया जाएगा और यह कक्षा 12 तक जारी रहेगा। राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के विकास और कर्नाटक के सार्वजनिक स्कूलों के उन्नयन के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि का उपयोग कर रही है।
शिवकुमार ने कहा कि कन्नड़ केवल एक आधिकारिक भाषा बनकर न रह जाए, बल्कि लोगों के दिलों की भाषा बने। बच्चों को सबसे पहले कन्नड़ सीखनी चाहिए और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी करते हुए भी इसे अपने दैनिक जीवन में उपयोग करना चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि भाषा की कोई सीमा नहीं होती। डिजिटल युग में, हम मोबाइल फोन पर सभी भाषाओं का उपयोग कर सकते हैं। भाषाओं की प्रतिस्पर्धा के बीच, कन्नड़ का विकास होना चाहिए। अगर हम अपनी भाषा से प्यार करते हैं, तो यह हमारी रक्षा करेगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला और साहित्य में रुचि विकसित करने का आग्रह किया।
राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए की गई पहलों पर प्रकाश डालते हुए, शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक के एथलीटों ने एशियाई खेलों में आठ पदक जीते हैं।
राज्य सरकार ने स्वर्ण पदक विजेताओं के लिए 1 करोड़ रुपए, रजत पदक विजेताओं के लिए 75 लाख रुपए और कांस्य पदक विजेताओं के लिए 50 लाख रुपए के नकद प्रोत्साहन की घोषणा की थी। एशियाई खेलों में भाग लेने वाले एथलीटों को 5 लाख रुपए प्रत्येक दिए गए, जबकि पैरालंपिक की तैयारी कर रहे एथलीटों को 10 लाख रुपए प्रत्येक प्रदान किए जा रहे थे।
–आईएएनएस
एमएस/
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