NCP Nawab Malik : उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक ( Nawab Malik ) को मंगलवार को मेडिकल बेसिस पर जमानत दे दी। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने मलिक की ओर से पेश वकील की दलीलों पर गौर किया कि वह विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे हैं।
Highlights:
- एनसीपी नेता नवाब मालिक को मिली जमानत
- बंबई उच्च न्यायालय ने मेडिकल बेल पर दी जमानत
- मलिक किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं
शीर्ष अदालत ने कहा कि मलिक को चिकित्सा आधार पर दी गई जमानत बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष नियमित जमानत याचिका के निपटारे तक वैध होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध नहीं किया और कहा कि अंतरिम चिकित्सा जमानत को स्थायी किया जा सकता है।
बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष न्यायालय का किया था रुख
नवाब मलिक ( Nawab Malik ) को अगस्त 2023 में प्रदान की गई चिकित्सा जमानत को समय समय पर बढ़ाया जाता रहा है। मलिक ने बंबई उच्च न्यायालय के 13 जुलाई 2023 के आदेश के खिलाफ शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें ईडी की जांच वाले इस मामले में चिकित्सा आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया था।
किस मामले में थे जेल में बंद ?
उच्चतम न्यायालय ने पहले कहा था कि नवाब मलिक ( Nawab Malik ) किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं और 11 अगस्त 2023 के बाद से उनकी स्थिति में सुधार नहीं आया है। मलिक को तब दो महीने के लिए अंतरिम जमानत दी गयी थी। ईडी ने भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके साथियों की गतिविधियों से कथित तौर पर जुड़े मामले में फरवरी 2022 को मलिक को गिरफ्तार किया था। मलिक ने उच्च न्यायालय से राहत मांगते हुए दावा किया था कि वह किडनी की बीमारी के अलावा कई अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। मलिक के खिलाफ ईडी का मामला वैश्विक आतंकवादी और 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम तथा उसके साथियों के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत दर्ज एक प्राथमिकी पर आधारित है।


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