वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में ‘प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020’ पेश किया है. इस विधेयक में देश में 9.32 लाख करोड़ रुपये से जुड़े कर विवाद के मामलों के समाधान के प्रावधान हैं। विधेयक को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने विधेयक में विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे पहले विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विधेयक के अंग्रेजी नाम में भी ‘विवाद से विश्वास’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने कहा कि कई लोग इस हिंदी शब्द को नहीं समझ सकते लेकिन ऐसा लग रहा है कि इस नाम से सरकार हिंदी थोप रही है। चौधरी ने कहा कि ‘‘विवाद से विश्वास’’ कौन समझेगा। कांग्रेस के शशि थरूर ने भी विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। सीतारमण ने कहा कि यह पूरे समय के लिए योजना नहीं है और एक निश्चित समयावधि तक इसका लाभ उठाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विधेयक इसलिए लाया गया है कि जिन लोगों के कर विवाद हैं उन्हें अपील पर अपील करनी होती है और दोनों पक्षों का धन व्यय होता है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस विधेयक में बिना किसी भेदभाव के फॉर्मूला आधारित ढांचागत समाधान दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार के लिए भी विवाद निस्तारण पर होने वाला खर्च कम होगा और कुछ राजस्व अर्जित करने में मदद मिलेगी।
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वित्त मंत्री ने एक फरवरी को अपने बजट भाषण में अनेक न्यायाधिकरणों में लंबित 4,83,000 प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान के लिए ‘विवाद से विश्वास’ योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत वे करदाता अपना बकाया कर 31 मार्च, 2020 तक जमा कर सकते हैं और ब्याज तथा जुर्माने पर पूरी छूट प्राप्त कर सकते हैं जिनके कर संबंधी विवाद कई अधिकरणों में लंबित हैं। चौधरी की हिंदी नाम वाली चिंता पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार हिंदी नहीं थोप रही है। सीतारमण ने कहा कि उन्होंने बजट भाषण में इसकी अंग्रेजी शब्दावली का भी इस्तेमाल किया था।


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