राज्यसभा से विपक्ष के 12 सांसदों के निलंबन से पैदा हुआ गतिरोध टूटने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष निलंबन और किसानों की मौत को लेकर दोनों सदनों में लगातार हंगामा कर रहा है। हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच उच्च सदन के नेता पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले का कोई समाधान कैसे निकलेगा जब अनुचित आचरण के लिए निलंबित किए गए सदस्य माफी मांगने को तैयार नहीं।
गोयल का यह बयान राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा के एक आरोप के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा कि जब 12 निलंबित सदस्य संसद भवन परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे तब भारतीय जनता पार्टी के कुछ सदस्य भी वहां पहुंच गए और हंगामा खड़ा करने की कोशिश की। झा ने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों को छीने जाने के जैसा है। सदन में मौजूद अन्य विपक्षी सदस्य भी इस मुद्दे को उठाना चाहते थे। उसी समय राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि विपक्ष के नेता (मल्लिकार्जुन खड़गे) को सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर ना बोलने देने को लेकर जो गलत धारणा है, उसके बारे में वह स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को 30 नवंबर को शून्यकाल के दौरान पांच मिनट बोलने के लिए समय दिया गया था। उन्होंने कह, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि सभी मिलकर इस मामले का समाधान निकालने की दिशा में काम करेंगे। मैंने नेता सदन और विपक्ष के नेता को इस बारे में चर्चा करने और सदन की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है।’’ इस पर गोयल ने कहा कि कैसे कोई समाधान निकलेगा जब निलंबित सदस्य माफी मांगने को भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने पूछा, ‘‘मैं आपसे समझना चाहता हूं सर। विपक्ष हमसे क्या उम्मीद करता है। गोयल ने दावा किया कि विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने इस मुद्दे पर उनसे संपर्क किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कहा कि मुझे आप सभी से मिलने की खुशी है लेकिन…माफी मांगना आसन और देश के प्रति एक शिष्टाचार होता है। उन्होंने कहा कि हम माफी नहीं मांग सकते।’’नेता सदन ने कहा कि उन्होंने विपक्षी सदस्यों को बताया कि पूर्व में छोटी सी घटना तक के लिए वह माफी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह (विपक्षी सदस्य) समझते हैं कि उन्होंने जो किया है वह जायज और आदर्श है। इन परिस्थितियों में हम विपक्ष से क्या बात करें।’’ गोयल ने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता ओर कुछ निलंबित सदस्य पिछले कुछ दिनों से उकसाने वाले बयान दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ‘‘माफी किस बात की’’। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि वह सदन में अपने आचरण को उचित ठहरा रहे हैं। निलंबित राज्यसभा सदस्य अपने खिलाफ की गई इस कार्रवाई के विरोध में संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक निलंबन रद्द नहीं होगा, तब तक वे संसद की कार्यवाही के दौरान सुबह से शाम तक महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे रहेंगे।
संसद के सोमवार को आरंभ हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि तक के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।


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