किश्नो देवी बीमार थीं जिसकी वजह से वह चल नहीं सकती थीं।किश्नो देवी अपनी आखिरी सांसें ही गिन रहीं थीं लेकिन वह चाहती थीं कि दुनिया से जाने से पहले वह एक बार वोट करके जाएं। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हो गए हैं और जब 11 अप्रैल को उनके क्षेत्र में वोट हुआ तो उन्होंने भी पोलिंग बूथ पर जाने की जिद की और कहा मैं भी वोट डालऊंगी।
किश्नो देवी भी वहां वोट डालने गईं और उन्होंने अपना वोट डाला भी लेकिन उनकी एक-दो घंटे बाद ही मौत हो गई। किश्नो देवी अपनी आखिरी पलों में सांस लेते हुए संतुष्ट थीं कि उन्होंने जाते-जाते हुए भी देश के एक अच्छे नागरिक उन्होंने के नाते उन्होंने अपना फर्ज निभाया। किश्नो देवी ने जब वोट दिया था तो वह बहुत खुश थीं।
चरथावल क्षेत्र के ग्याना मजारा गांव में किश्नो रहती थीं। बीते गुरुवार को जब पहले चरण के वोट डाले गए तो उन्होंने अपने परिवार वालों के साथ पोलिंग बूथ पर जाकर अपना वोट डाला। पहले तो उनके परिवार वाले उन्हें वोट डालने के लिए नहीं ले जा रहे थे लेकिन उनका दृढ़ निश्चय देखकर उन्हें वोट डालने के लिए ले गए। किश्नो देवी को पोलिंग बूथ तक उनकी चारपाई पर ही बैठा कर ले गए थे।
पोलिंग बूथ तक चारपाई पर लिटाकर ले गए
किश्नो देवी के गांव के प्रधान कंवरपाल ने इस मामले में बात करते हुए बताया, जब उनके बेटे और बहू गांव के पोलिंग सेंटर आए और उन्होंने मुझे उनकी आखिरी इच्छा के बारे में बताया तो मैंने इसके लिए इंतजाम करने का फैसला किया। किश्नो देवी के घर पर ग्राम प्रधान के साथ तीन लोग गए और उन्हें चारपाई पर ही पोलिंग बूथ पर लेकर आए और उन्होंने शाम के साढ़े पांज बजे अपना वोट दिया।
66.67 फीसदी वोटिंग हई मुजफ्फरनगर में
किश्नो देवी के बेटे राजपाल सिंह ने बताया, वह हमेशा से मतदान करने का विशेष ध्यान रखती थीं। इस बार उनकी किडनी फेल हो गई थी लेकिन फिर यह उनके जज्बे को हरा नहीं पाया। मुजफ्फरनगर में पहले चरण के चुनाव हुए जिसमें 66.67 फीसदी वोटिंग हुई। इस सीट पर आरएलडी मुखिया अजित सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के बीच में मुकाबला है। इस जगह पर लगभग 16 लाख से भी ज्यादा वोटर हैं।


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