प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ‘मंडुवाडीह’ रेलवे स्टेशन का नाम ‘बनारस’ रखने की शनिवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यहां के तीन स्टेशन अब इस प्राचीन धार्मिक शहर के मशहूर तीन नामों- काशी, वाराणसी और बनारस – से अलग-अलग जाने जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में वाराणसी के मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शनिवार से पूर्वोत्तर रेलवे का यह स्टेशन अब ‘बनारस’ के नाम से जाने लगा है। इस प्राचीन शहर में ‘बनारस’, ‘वाराणसी’ और ‘काशी’ तीन अलग-अलग स्टेशन हैं। ये सभी स्टेशन पहले से ही मौजूद हैं।
‘वाराणसी’ और ‘काशी’ नाम पहले से ही मौजूद है। तीसरा स्टेशन अब तक मंडुवाडीह के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में वाराणसी के नाम से जाना जाने वाला यह धार्मिक शहर अलग-अलग समय में आधिकारिक तौर पर काशी एवं बनारस के नाम से जाना जाता था।
आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने संबंधी अधिसूचना जारी होने के बाद रेलवे बोर्ड ने अन्य औपचारिकताएं पूरी कर दी। इसके बाद इस स्टेशन का नाम बदल कर ‘बनारस’ कर दिया गया। इस स्टेशन का कोड अब ‘बी एस बी एस’ कर दिया गया है। नाम के तमाम बोर्ड बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
इससे पहले ‘बनारस’ रेलवे स्टेशन (बी एस बी एस) का स्टेशन कोड ‘एम यू वी’ यानी मंडुवाडीह था जबकि वाराणसी रेलवे स्टेशन का स्टेशन कोड ‘बी एस बी’ और काशी का कोड ‘के ई आई’ पहले की तरह ही रहेगा है।
गौरतलब है कि केंद, की मोदी सरकार के तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के कार्यकाल में मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की प्रक्रिया स्थानीय लोगों की लगातार मांग पर शुरू हुई थी। गत 17 अगस्त को केंद्र सरकार ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था। इस आधार पर 17 सितम्बर को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी के बाद नाम बदलने संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी।


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