Uttar Pradesh News: देशभर में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और इनमें होने वाली मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अजय कुमार पांडे ने चिंता जताई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर सड़क सुरक्षा को लेकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
डॉ. पांडे ने अपने पत्र में हाल ही में हुई उस सड़क दुर्घटना का उल्लेख किया है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे प्रभात सिंह की जान चली गई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना दिखाती है कि सड़क दुर्घटनाएं किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती हैं। चाहे आम नागरिक हो या किसी बड़े परिवार का सदस्य, सड़क सुरक्षा की कमी सभी के लिए खतरा बन चुकी है।
Uttar Pradesh News: जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं अब केवल यातायात व्यवस्था की समस्या नहीं रह गई हैं। यह देश के नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि सड़कों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होंगे, तो लोगों का जीवन लगातार खतरे में बना रहेगा।
डॉ. पांडे ने मांग की है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर मौजूद दुर्घटना संभावित स्थानों, जिन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही जहां सड़क निर्माण या रखरखाव में लापरवाही पाई जाए, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
शिकायत करने वालों के उत्पीड़न का आरोप
उन्होंने यह भी कहा कि कई जगहों पर सड़क सुरक्षा की समस्याओं को उठाने वाले लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को परेशान किया जाता है। कई मामलों में उन पर दबाव बनाया जाता है या झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की अपील
डॉ. पांडे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में होने वाली मौतें और प्रशासनिक लापरवाही सीधे तौर पर मानवाधिकारों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा किसी राजनीतिक बहस का विषय नहीं है। यह हर नागरिक की जान बचाने का सवाल है। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान किसी जाति, धर्म, क्षेत्र या राजनीतिक दल से नहीं होती, इसलिए इस मुद्दे पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी
डॉ. पांडे ने कहा कि यदि तय समय के भीतर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वह सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेंगे। इसके जरिए देशभर में सड़क सुरक्षा, ब्लैक स्पॉट्स की पहचान, अधिकारियों की जवाबदेही और दुर्घटना पीड़ित परिवारों के अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की जाएगी।
अंत में उन्होंने नागरिकों, सामाजिक संगठनों, वकीलों, डॉक्टरों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे सुरक्षित सड़कों के लिए चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान से जुड़ें और सड़क सुरक्षा को एक जन आंदोलन का रूप दें।


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