Kalava Utarne Ka Sahi Tareeka: हुिंदू धर्म में कलावा को सिर्फ एक साधारण धागा नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा से जुड़ा हुआ मानते हैं। कई लोग कलावा पहन तो लेते हैं, लेकिन उसे उतारते समय नियमों का ध्यान नहीं रखते। शास्त्रों में इसे गलत बताया गया है। जिस तरह हम भगवान की मूर्तियों या पूजा के सामान को पूरे आदर के साथ विसर्जित करते हैं, उसी तरह पुराना कलावा उतारने का भी एक खास तरीका होता है। आइए जानते हैं कि पुराने कलावे को सही तरीके से कैसे विसर्जित करें।
Kalava Mistakes to Avoid: कलावा उतारते समय इस गलती से बचें
अक्सर लोग कलावा पुराना होने पर उसे उतारकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं या रास्ते में कहीं भी छोड़ देते हैं। ऐसा करना बिल्कुल गलत और अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से घर में वास्तु दोष बढ़ सकता है और राहु-केतु जैसे ग्रहों का बुरा असर पड़ सकता है। चूंकि यह पूजा का पवित्र धागा है, इसलिए इसे कहीं भी फेंकने के बजाय सही नियमों का पालन करना चाहिए।
Kalava Utarne Ka Sahi Tareeka: कलावा उतारने का सही नियम

- कलावा किसी भी दिन नहीं उतारना चाहिए। इसके लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है।
- कलावा उतारते समय कभी भी कैंची या चाकू का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसे हमेशा हाथों से खोलकर ही उतारें।
- कलावा उतारते समय अपने इष्ट देव को याद करें और उनसे अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करें।
- जैसे ही आप पुराना धागा उतारें, भगवान का नाम लेकर तुरंत हाथ पर नया कलावा बांध लें।
- आप पुराने कलावे को किसी पीपल या बरगद के पेड़ की जड़ के पास रख सकते हैं।
- इसे किसी साफ नदी या बहते हुए पानी में प्रवाहित करना भी शुभ होता है।
- अगर आप शहर में रहते हैं और पास में नदी या पेड़ नहीं है, तो इसे अपने घर के किसी गमले की मिट्टी में दबा दें।
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