Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole: नंदी के कान में मन्नत बोलते वक्त कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये चूक? जानिए सही नियम

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Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole: नंदी को भगवान शिव का बहुत प्रिय माना जाता है, यही वजह है कि शिव भक्त नंदी को शिव जी की सवारी के रूप में पूजते हैं। नंदी न सिर्फ शिव जी के वाहन हैं, बल्कि वे कैलाश पर्वत के द्वारपाल और शिव जी के सबसे पसंदीदा साथी भी हैं। जहा भी शिव जी होते हैं, वहा नंदी जरूर रहते हैं। नंदी के बिना शिव जी की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। माना जाता है कि अगर आप अपनी इच्छा नंदी के कान में कहेंगे, तो वह भगवान शिव तक जरूर पहुंचेगी। लेकिन शिव जी को नंदी इतने…

Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole: नंदी को भगवान शिव का बहुत प्रिय माना जाता है, यही वजह है कि शिव भक्त नंदी को शिव जी की सवारी के रूप में पूजते हैं। नंदी न सिर्फ शिव जी के वाहन हैं, बल्कि वे कैलाश पर्वत के द्वारपाल और शिव जी के सबसे पसंदीदा साथी भी हैं। जहा भी शिव जी होते हैं, वहा नंदी जरूर रहते हैं। नंदी के बिना शिव जी की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। माना जाता है कि अगर आप अपनी इच्छा नंदी के कान में कहेंगे, तो वह भगवान शिव तक जरूर पहुंचेगी। लेकिन शिव जी को नंदी इतने प्यारे क्यों हैं? इसके पीछे पुरानी कहानियां हैं। आइए जानें।

नंदी को सबसे बड़े शिव भक्त की उपाधि कैसे मिली?

Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole
Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole (AI Generated)

एक पुरानी कहानी के अनुसार, जब समुद्र मंथन से खतरनाक ‘हलाहल’ जहर निकला, तो भगवान शिव ने उसे खुद पी लिया। उस जहर की कुछ बूंदें जमीन पर गिर गईं, जिसे नंदी ने चाट लिया। जब शिव जी ने नंदी का अपने प्रति ऐसा गहरा लगाव देखा, तो उन्होंने नंदी को संसार का सबसे बड़ा शिव भक्त घोषित कर दिया। तभी से नंदी शिव जी के बहुत करीब हैं।

Nandi Birth Story: नंदी का जन्म कैसे हुआ?

Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole
Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole (Source: Social Media)

पौराणिक कहानी के अनुसार, शिलाद नाम के एक ऋषि थे जिनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने भगवान शिव को खुश करने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। इसके बाद शिव जी के आशीर्वाद से उन्हें नंदी पुत्र के रूप में मिले। ऋषि शिलाद ने नंदी को सारे वेदों और पुराणों की शिक्षा दी। एक बार उनके आश्रम में कुछ साधु-संत आए। जाते समय उन्होंने ऋषि को तो लंबी उम्र का आशीर्वाद दिया, लेकिन नंदी को नहीं। जब ऋषि ने इसका कारण पूछा, तो संतों ने बताया कि नंदी की उम्र बहुत कम है। यह सुनकर ऋषि चिंता में डूब गए, लेकिन नंदी ने उनसे कहा, “जब भगवान शिव ने मुझे आपको सौंपा है, तो वही मेरी रक्षा भी करेंगे।” इसके बाद नंदी ने शिव जी की घोर तपस्या की। नंदी की भक्ति से खुश होकर शिव जी ने उन्हें अपनी सवारी बना लिया। तब से नंदी शिव जी के सबसे बड़े भक्त हो गए और हमेशा उन्हीं के साथ रहने लगे। वे हमेशा शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग के सामने बैठते हैं और उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ शिव जी पर ही लगा रहता है।

Nandi Ji Mannat Rules: नंदी के कान में अपनी मनोकामना क्यों बोलनी चाहिए?

मान्यता है कि नंदी के कान में कही गई हर बात शिव जी तक पहुंचती है। नंदी दिन-रात शिव जी की भक्ति और ध्यान में डूबे रहते हैं, इसलिए वे भक्तों की इच्छाएं शिव जी तक पहुंचाने का जरिया बनते हैं। दरअसल, शिव जी अक्सर गहरी साधना में लीन रहते हैं, इसलिए नंदी ही भक्तों की बातें सुनते हैं और बाद में उन्हें शिव जी तक पहुंचाते हैं।

Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole: नंदी के कान में मनोकामना कैसे कहें?

Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole
Nandi Ji Ke Kaan Mein Kaise Bole (Source: Social Media)
  • नंदी की पूजा करें: कान में अपनी इच्छा बोलने से पहले नंदी जी की पूजा और आरती करना शुभ होता है।
  • बाएं कान में बोलें: मान्यताओं के अनुसार, नंदी के बाएं कान में अपनी बात कहना ज्यादा शुभ और फलदायी होता है।
  • हाथों से होंठों को ढकें: जब आप अपनी बात कह रहे हों, तो अपने हाथों से अपने होंठों को छिपा लें ताकि कोई और आपकी बात का अंदाज़ा न लगा सके।
  • धीमी आवाजं में कहें: अपनी इच्छा नंदी के कान में इतनी धीरे से बोलें कि आपके अलावा कोई दूसरा उसे सुन न सके।
  • पहले ‘ॐ’ बोलें: अपनी मनोकामना शुरू करने से पहले ‘ॐ’ शब्द का जाप करना बहुत अच्छा माना जाता है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।