Asim Munir China Visit: मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी चरम पर बना हुआ है। वहीं अमेरिका- ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर चर्चा जारी है। ऐसे में अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर( Pakistan Army Chief Munir) इस डील की रिपोर्ट पेश करने चीन पहुंच गए हैं। उनके साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि चीन इस पूरी बातचीत में पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभा रहा है और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान दौरे के बाद आसिम मुनीर सीधे बीजिंग पहुंचे हैं। यहां वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे और ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते से जुड़ी पूरी जानकारी साझा करेंगे।
Asim Munir China Visit: चीन को दी जाएगी बातचीत की पूरी जानकारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत लगभग रुक गई थी। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से इस मामले में सहयोग मांगा। इसके बाद चीन ने पाकिस्तान को बातचीत फिर से शुरू कराने की जिम्मेदारी दी। सबसे पहले दोनों देशों के बीच समझौते के शुरुआती ड्राफ्ट का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद यह तय किया गया कि पहले अंतरिम समझौते किए जाएंगे और फिर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
Asim Munir in China: तेहरान पहुंचे थे असीम मुनीर

बताया जा रहा है कि आसिम मुनीर (Asim Munir News) अमेरिका का संदेश लेकर खुद तेहरान पहुंचे थे। वहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन और वार्ता टीम के प्रमुख गालिबफ से मुलाकात की। इस बातचीत के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका तक ईरान का संदेश पहुंचाया, जिस पर अमेरिका ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। अब मुनीर चीन पहुंचकर पूरी स्थिति की जानकारी शी जिनपिंग को देंगे, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।
ईरान चाहता है मजबूत गारंटी
ईरान की सबसे बड़ी चिंता यह है कि भविष्य में अमेरिका समझौते से पीछे हट सकता है। इसी वजह से ईरान किसी बड़ी वैश्विक ताकत से सुरक्षा की गारंटी चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति जरूर बनी है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल किसी तरह की गारंटी नहीं मिली है। ईरान को डर है कि अगर अमेरिका भविष्य में अपने वादे से मुकरता है, तो क्षेत्र में फिर से तनाव और संघर्ष बढ़ सकता है। ऐसे में चीन को एक भरोसेमंद सहयोगी माना जा रहा है, जो इस समझौते की निगरानी और सुरक्षा गारंटी में अहम भूमिका निभा सकता है।
चीन निभा सकता है बड़ी भूमिका
चीन लंबे समय से ईरान का करीबी सहयोगी रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले संघर्षों के दौरान चीन ने ईरान को तकनीकी और सैन्य सहायता भी उपलब्ध कराई थी। यही वजह है कि ईरान चाहता है कि चीन इस समझौते में सक्रिय भूमिका निभाए। अब सबकी नजर आसिम मुनीर और शी जिनपिंग की बैठक पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में भविष्य की रणनीति और समझौते की गारंटी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
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