वॉशिंगटन, 25 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर के बीच 1971 में हुई बातचीत का एक सीक्रेट ट्रांसक्रिप्ट सामने आया है। ट्रांसक्रिप्ट से पता चलता है कि अमेरिका ने अपने ही डिप्लोमैट की तरफ से संभावित “नरसंहार” की चेतावनी के बावजूद, पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तान की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई की आलोचना करने से इनकार कर दिया था।
28 मार्च 1971 को दर्ज इस बातचीत में दिखाया गया है कि किसिंजर ने निक्सन को ढाका में अमेरिकी वाणिज्य दूत आर्चर ब्लड के एक असहमति वाले संदेश के बारे में बताया, जिसमें उन्होंने आम लोगों के नरसंहार की सूचना दी थी।
ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, किसिंजर ने कहा, “हमें ढाका में अपने वाणिज्य दूत से एक संदेश मिला है जिसमें वह चाहते हैं कि हम पश्चिम पाकिस्तान की कार्रवाइयों की निंदा करते हुए बयान जारी करें, लेकिन जाहिर है हम इस पर विचार नहीं करेंगे।”
हालंकि, निक्सन ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए भगवान की दुहाई भी दी, लेकिन फिर भी किसिंजर ने उस राजनयिक की अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही निक्सन ने उस वाणिज्य दूत के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देते हुए कहा, “उन्हें हटा दो। मैं चाहता हूं कि उन्हें इस पद से बाहर कर दिया जाए।”
निक्सन ने बाद में कॉल में कहा, “मैं इसकी तारीफ में कोई बयान नहीं दूंगा, लेकिन हम इसकी बुराई भी नहीं करेंगे।”
किसिंजर ने चेतावनी दी कि सार्वजनिक तौर पर इस मामले में एक पक्ष लेने से गुस्सा भड़क सकता है। उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसा करते हैं तो पश्चिमी पाकिस्तान में अमेरिका के खिलाफ दंगे होंगे।”
इतिहासकार टॉम वेल्स की नई किताब द किसिंजर टेप्स मार्च में पब्लिश हुई। जिस ट्रांसक्रिप्ट की चर्चा हो रही है, वह इसी किताब का हिस्सा है, जो 1969 और 1974 के बीच निक्सन सरकार के दौरान किसिंजर के समय की सैकड़ों सीक्रेट तौर पर रिकॉर्ड की गई टेलीफोन बातचीत पर आधारित है।
यह किताब “टेलकॉन्स” के हजारों पन्नों पर आधारित है, जिन्हें नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव की अगुवाई में लंबे कानूनी प्रयासों के बाद हासिल कर डीक्लासिफाई किया गया। आखिरकार 2004 में 15,000 से ज्यादा पन्नों के ट्रांसक्रिप्ट जारी किए गए।
वेल्स के अनुसार, यह सामग्री उनके सत्ता काल का एक व्यापक परिदृश्य प्रस्तुत करती है और उस समय लिए गए अहम फैसलों व विवादों पर प्रकाश डालती है। इसमें सहयोगी सरकारों द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी शामिल है।
1971 में आर्चर ब्लड की असहमति अमेरिकी डिप्लोमैट्स द्वारा सरकारी नीति के खिलाफ सबसे बड़े विरोधों में से एक है। आर्चर ब्लड को बाद में “ब्लड टेलीग्राम” के नाम से जाना गया। ब्लड ने वॉशिंगटन से पूर्वी पाकिस्तान में हुई हत्याओं के खिलाफ नैतिक स्टैंड लेने का आग्रह किया था।
1971 में पूर्वी पाकिस्तान में हुई घटनाओं की वजह से मानवीय संकट पैदा हुआ और आखिरकार उसी साल बाद में भारत के सैन्य दखल के बाद बांग्लादेश बना। लड़ाई के दौरान भारी संख्या में आम लोग मारे गए।
–आईएएनएस
केके/एएस
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