गंभीर संवैधानिक संकट में है बांग्लादेश, जनता को तय करना है देश का भविष्य : शेख हसीना

Summary :

जिनेवा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश का भविष्य डर या ताकत के जरिए नहीं, बल्कि वहां के लोगों की स्वतंत्र और पूरी जानकारी के आधार पर दी गई राय से तय होना चाहिए। देश इस समय ‘गंभीर संवैधानिक संकट’ से जूझ रहा है। यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित एक सेमिनार में कही। हाल ही में जिनेवा में आयोजित इस सेमिनार का विषय था ‘बांग्लादेश का संवैधानिक संकट: शिक्षा का अधिकार, मनमानी हिरासत और ट्रिब्यूनल के कथित तौर पर गढ़े गए फैसले।’ इस कार्यक्रम में पूर्व राजनीतिक नेता, वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता, रिसर्चर और…

जिनेवा, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश का भविष्य डर या ताकत के जरिए नहीं, बल्कि वहां के लोगों की स्वतंत्र और पूरी जानकारी के आधार पर दी गई राय से तय होना चाहिए। देश इस समय ‘गंभीर संवैधानिक संकट’ से जूझ रहा है। यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित एक सेमिनार में कही।

हाल ही में जिनेवा में आयोजित इस सेमिनार का विषय था ‘बांग्लादेश का संवैधानिक संकट: शिक्षा का अधिकार, मनमानी हिरासत और ट्रिब्यूनल के कथित तौर पर गढ़े गए फैसले।’ इस कार्यक्रम में पूर्व राजनीतिक नेता, वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता, रिसर्चर और यूरोप, एशिया तथा अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

अवामी लीग के मुताबिक, जिनेवा प्रेस क्लब में हुए सेमिनार में बांग्लादेश की संवैधानिक व्यवस्था, कानून के शासन, मानवाधिकार, राजनीतिक भागीदारी, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए शेख हसीना ने कहा कि जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाएं बांग्लादेश में शांति या खुशहाली लाने में नाकाम रही हैं।

उन्होंने मौजूदा बीएनपी सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई, मनमानी हिरासत, राजनीति से प्रभावित कानूनी कार्यवाही और दूसरे कदम उठाने का आरोप लगाया। शेख हसीना ने दावा किया कि लोगों की राजनीतिक पहचान की वजह से इस तरह की कार्रवाइयां छात्रों और दूसरे नागरिकों के शैक्षणिक और प्रोफेशनल भविष्य को नुकसान पहुंचा रही हैं।

शेख हसीना ने बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में कथित हिंसा, हत्याओं, गिरफ्तारियों और असुरक्षा से जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कई घटनाएं मीडिया तक भी नहीं पहुंच पातीं।

उन्होंने कहा कि अब इस स्थिति को सिर्फ राजनीतिक अस्थिरता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, लोगों की सुरक्षा और सरकार की जिम्मेदारी से जुड़ा संकट बन चुका है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यूनिवर्सिटी और दूसरे शिक्षण संस्थानों में दबाव और कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्रों का दाखिला रद्द कर दिया गया या उनके सर्टिफिकेट रोक दिए गए, जबकि राजनीतिक जुड़ाव की वजह से कुछ युवा प्रोफेशनल्स को नौकरी से सस्पेंड किया गया।

शेख हसीना ने कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान को पूरे समूह का अपराध नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप है तो तय कानूनी प्रक्रिया के तहत उसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।”

हिरासत और न्याय व्यवस्था का जिक्र करते हुए शेख हसीना ने दावा किया कि अवामी लीग के हजारों नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हिरासत में लिया गया, उनके खिलाफ मामले चलाए गए या उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने आपराधिक और आतंकवाद विरोधी कानूनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। हसीना ने आरोप लगाया कि उचित कानूनी प्रक्रिया, सभी के साथ बराबर व्यवहार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता दबाव में है।

उन्होंने न्यायिक और ट्रिब्यूनल की प्रक्रियाओं के जरिए अवामी लीग को राजनीति से बाहर करने की कथित कोशिशों की भी आलोचना की। शेख हसीना ने कहा, “अगर न्यायिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदला लेने के लिए किया जाता है, तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा।”

मौत की सजा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर ही सवाल हों, तो ‘सरकार को किसी व्यक्ति की जान लेने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’

अवामी लीग पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाते हुए शेख हसीना ने कहा कि अगर किसी बड़ी राजनीतिक ताकत और उसके समर्थकों को राजनीतिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने से बाहर रखा जाता है, तो चुनाव को सही मायने में प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश का भविष्य बांग्लादेश के लोगों को ही तय करना चाहिए।” हसीना ने कहा कि यह फैसला लोगों की स्वतंत्र और पूरी जानकारी पर आधारित पसंद से होना चाहिए, न कि डर, ताकत या प्रशासनिक आदेशों के जरिए। उन्‍होंने संयुक्त राष्ट्र, लोकतांत्रिक देशों की सरकारों, मानवाधिकार संगठनों, कानूनी समुदाय और बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से देश के हालात पर करीब से नजर रखने की अपील की।

उन्होंने मनमानी हिरासत और राजनीतिक वजहों से कथित उत्पीड़न को खत्म करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया बहाल करने, छात्रों और प्रोफेशनल्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सरकारी हिरासत में मौजूद लोगों को पर्याप्त मेडिकल सुविधा देने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों के अधिकार की गारंटी देने की भी अपील की।

–आईएएनएस

एवाई/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.