Delhi News : आदिवासी समाज के विकास के लिए गांव-स्तर के वॉलंटियर्स (स्वयंसेवकों) का एक ट्रेंड और सर्टिफाइड ग्रुप तैयार करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय और कर्मयोगी भारत के बीच मंगलवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू ‘मिशन कर्मयोगी’ के क्षमता निर्माण फ्रेमवर्क का दायरा बढ़ाता है, जो अब तक सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर केंद्रित था। अब इसमें ‘आदि कर्मयोगी वॉलंटियर्स’ और ज़मीनी स्तर पर आदिवासी विकास योजनाओं को लागू करने वाले अधिकारी भी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि यह पहल ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ का हिस्सा है, जिसके तहत मंत्रालय 76,000 से ज्यादा ‘आदि सेवा केंद्रों’ और एकेवीएस नेटवर्क को गांव-स्तर के स्थायी प्लेटफॉर्म के तौर पर संस्थागत रूप दे रहा है। ये प्लेटफॉर्म सुविधाएं देने, नागरिकों को जोड़ने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने (लास्ट-माइल कन्वर्जेंस) का काम करेंगे। ‘कर्मयोगी भारत’ इस प्लेटफॉर्म को होस्ट, ऑपरेट और मेंटेन करेगा, साथ ही लर्नर्स को ऑनबोर्ड करेगा, टेक्निकल सपोर्ट और एनालिटिक्स देगा, और प्रोग्रेस की रिपोर्ट तैयार करेगा।
वहीं, जनजातीय कार्य मंत्रालय डोमेन ओनर के तौर पर, टारगेट ग्रुप्स और जरूरी क्षमताओं की पहचान करेगा, कंटेंट तैयार करके उसे मंज़ूरी देगा। साथ ही लर्नर्स को नॉमिनेट करेगा और प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा। इस बारे में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने बताया कि आईजीओटी कर्मयोगी पर ‘आदि कर्मयोगी’ माइक्रोसाइट, जनजातीय क्षेत्रों में क्षमता निर्माण तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और जमीनी स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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