वॉशिंगटन, 10 जून (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि इबोला महामारी के बढ़ते खतरे, संघीय स्वास्थ्य एजेंसियों में खाली नेतृत्व पदों और ट्रंप प्रशासन के दौरान हुई भारी स्टाफ कटौती ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सीनेटर पैटी मरे और टिम केन के नेतृत्व में सांसदों ने स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (एचएचएस) के सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर को एक पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि प्रशासन के कदमों ने अमेरिका की संक्रामक रोगों का पता लगाने और उनसे निपटने की क्षमता को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने पत्र में लिखा, “जब हमारा देश विश्व कप के लिए दुनियाभर से आने वाले यात्रियों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है, तो यह बेहद जरूरी है कि हमारे पास सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को संभालने के लिए स्पष्ट और व्यापक योजनाएं और संचार व्यवस्थाएं हों।
हम आपसे आग्रह करते हैं कि सभी आवश्यक खाली सार्वजनिक स्वास्थ्य पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, संक्रमित या जोखिम में आए अमेरिकी नागरिकों के इलाज के लिए एक ठोस, पारदर्शी और मानवीय योजना बनाई जाए और जनता के साथ बेहतर संवाद किया जाए।”
यह पत्र ऐसे समय में आया है, जब इबोला का प्रकोप बढ़ रहा है और हंतावायरस के मामलों में भी असामान्य वृद्धि देखी जा रही है। सीनेटरों ने प्रशासन पर ‘विज्ञान-विरोधी एजेंडा’ अपनाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने और बढ़ते वैश्विक स्वास्थ्य खतरों के दौरान स्थिर नेतृत्व देने में विफल रहने का आरोप लगाया।
सीनेटरों के मुताबिक, विभाग के हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला या पद छोड़ने पर मजबूर किया गया और अब एचएचएस अपनी शुरुआती क्षमता की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम क्षमता पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि कटौती के तहत फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के 3,500, सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के 3,400 और नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के 4,600 पूर्णकालिक कर्मचारियों की संख्या कम हुई है।
सीनेटरों ने विभाग में नेतृत्व की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लिखा, “एचएचएस में सीनेट से पुष्टि होने वाले 18 पदों में से केवल छह पदों पर ही पुष्टि प्राप्त अधिकारी कार्यरत हैं।”
उन्होंने कहा कि सीडीसी, एफडीए और एडमिनिस्ट्रेशन फॉर स्ट्रैटजिक प्रिपेयर्डनेस एंड रिस्पॉन्स के पास स्थायी नेतृत्व नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के पास फिलहाल सीनेट से पुष्टि प्राप्त सर्जन जनरल भी नहीं है।
सीनेटरों ने कहा कि कर्मचारियों की कमी का असर उन एजेंसियों पर भी पड़ा है जो संक्रामक रोगों की तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार हैं। उनका कहना था कि वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के बीच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज में खाली पद विशेष रूप से चिंता का विषय हैं।
पत्र में इबोला प्रकोप से निपटने के प्रशासन के तरीके की भी आलोचना की गई। सीनेटरों ने लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से बाहर निकलने का फैसला इबोला से लड़ने के प्रयासों को गंभीर रूप से कमजोर कर चुका है। इससे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की भारी कमी हुई, संपर्क खोज (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) के काम में बाधा आई और प्रतिक्रिया में देरी हुई, जिससे वायरस को फैलने का मौका मिला।”
–आईएएनएस
एवाई/वीसी
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