नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घरीबाबादी बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली पहुंचे। उनका स्वागत विदेश मंत्रालय में पश्चिमों मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने किया। दोनों के बीच उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया एक्स पर घरीबाबादी के साथ तस्वीरें शेयर की गईं। पोस्ट के अनुसार दोनों के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रम भी शामिल थे।
भारत-ईरान के रिश्ते आपसी समझबूझ, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक विश्वास पर टिके हैं। यही वजह है कि 28 फरवरी से अब तक विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से कई बार फोन पर बात की है। फरवरी के आखिर में तेहरान समेत ईरान के दूसरे शहरों पर अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त हवाई हमला किया था।
पिछले महीने, जयशंकर को अराघची की ओर से फोन आया था, जिस दौरान दोनों मंत्रियों ने वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के साथ-साथ बाइलेटरल रिश्तों पर “विस्तृत बातचीत” की थी।
इसकी जानकारी जयशंकर ने 29 अप्रैल को एक्स पोस्ट पर दी थी। उन्होंने लिखा, ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने मुझे शाम को कॉल किया। वर्तमान हालात पर उनसे विस्तृत बातचीच हुई। हमने एक दूसरे के संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
बाद में ईरानी दूतावास ने भी बताया कि दोनों के बीच संघर्ष विराम, द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहन वार्ता हुई।
21 मार्च को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की और पश्चिम एशिया संकट पर अपनी चिंता से अवगत कराया। इस दौरान, पीएम मोदी ने इलाके में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की निंदा की और शिपिंग लेन को खुला, सुरक्षित रखने के साथ-साथ नौवहन की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।
दोनों नेताओं ने इससे पहले 12 मार्च को भी बात की थी। पीएम मोदी ने ‘डिप्लोमेसी और डायलॉग’ के जरिए मामले को सुलझाने की जरूरत पर बल दिया था।
फिलहाल दिल्ली पहुंचे घरीबाबादी की बात करें तो वो ईरान के वरिष्ठ राजनयिक हैं और अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों, मानवाधिकार और क्षेत्रीय कूटनीति से जुड़े मुद्दों में ईरान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े सुरक्षा और ऊर्जा मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बने हुए हैं। भारत–ईरान संवाद, ब्रिक्स और क्षेत्रीय कूटनीतिक मंचों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
–आईएएनएस
केआर/
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