वॉशिंगटन, 5 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति में ट्रंप प्रशासन के ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर तीखी बहस हुई। वित्त वर्ष 2027 के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) पर चर्चा के दौरान इस युद्ध की लागत, रणनीति और अमेरिका की वैश्विक प्राथमिकताओं पर इसके असर को लेकर गहरे मतभेद सामने आए।
कांग्रेस में हुई इस बैठक के दौरान डेमोक्रेटिक लॉमेकर्स ने बार-बार प्रशासन की युद्ध संबंधी नीति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कांग्रेस और अमेरिकी जनता को अब तक इस युद्ध की वास्तविक लागत और इसके रणनीतिक परिणामों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
प्रतिनिधि सेठ मौल्टन ने कहा कि कांग्रेस को यह पता होना चाहिए कि इस युद्ध पर कितना खर्च हो रहा है। उनका कहना था कि जब तक पूरी वित्तीय जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक प्रतिनिधि अपनी निगरानी और जवाबदेही की जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा सकते।
मौल्टन ने प्रस्ताव रखा कि रक्षा विभाग ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों पर हुए खर्च का विस्तृत हिसाब पेश करे। उन्होंने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी जनता पारदर्शिता की हकदार है।
प्रतिनिधि जेसन क्रो ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह कर्तव्य है कि वह जाने कि इस युद्ध पर करदाताओं का कितना पैसा खर्च हो रहा है।
समिति में शीर्ष डेमोक्रेट एडम स्मिथ ने कहा कि पेंटागन से अधिक पारदर्शिता के बिना लॉमेकर प्रभावी निगरानी नहीं कर सकते।
स्मिथ ने कहा, “हमें वास्तव में यह जानने की जरूरत है कि कितना खर्च हो रहा है और पैसा कहां जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के ईरान संबंधी बड़े उद्देश्यों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।
वहीं रिपब्लिकन लॉमेकर्स ने प्रशासन के कदमों का जोरदार बचाव किया।
समिति के अध्यक्ष माइक डी. रोजर्स ने इस संघर्ष को ‘पसंद से चुना गया युद्ध’ बताए जाने का विरोध किया और कहा कि सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया है।
रोजर्स ने कहा, “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने उन पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।” उनका दावा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीति अमेरिका को ऐसे समझौते के करीब ले आई है जो ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पैदा होने वाले खतरे को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है।
कांग्रेस सदस्य जो विल्सन ने भी प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से एक खतरा रहा है और अमेरिकी हितों तथा क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी।
आखिर में समिति ने मोल्टन के संशोधन प्रस्ताव को 30-27 मतों से खारिज कर दिया।
–आईएएनएस
एवाई/एएस
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