तेहरान, 24 मई (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनका देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना चाहता है और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत में पूरी सावधानी बरत रहा है।
शनिवार (स्थानीय समय) को राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असिम मुनीर के साथ मुलाकात में पेजेशकियन ने कहा कि वॉशिंगटन की ओर से बार-बार समझौतों का उल्लंघन, बातचीत के दौरान ईरान पर हमले, और उसके अधिकारियों की टारगेटेड हत्या जैसी घटनाओं की वजह से जनता में गहरा अविश्वास है।
पेजेशकियन ने कहा कि ऐसे हालात में ईरान ने अपने ‘भाई जैसे संबंधों’ वाले मित्र देशों के साथ मिलकर बातचीत की है, लेकिन हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ ईरानी जनता के हितों की रक्षा करना है और इसके लिए उचित समाधान ढूंढना है।
उन्होंने कहा, “हम सिर्फ अपने लोगों के कानूनी और वैध अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत का हमारा इतिहास और अनुभव हमें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने के लिए मजबूर करता है।”
उन्होंने कहा कि युद्ध कभी भी किसी के हित में नहीं होता और इससे पूरे क्षेत्र और दुनिया को नुकसान ही होगा।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात तेहरान पहुंचे मुनीर ने इस मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इसका परिणाम ईरान और क्षेत्रीय देशों के लिए अच्छा होगा।
इसके अलावा, ईरान की अर्ध-सरकारी ‘फार्स’ समाचार एजेंसी ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि अगर वॉशिंगटन लचीलापन नहीं दिखाता, तो तेहरान के साथ शांति वार्ता असफल हो सकती है।
फार्स ने ईरानी वार्ता टीम के करीबी एक जानकार सूत्र का हवाला देते हुए बताया कि ईरान ने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं। पहला, इस समय उसके परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा नहीं होगी। दूसरा, बातचीत से पहले उसकी फ्रीज की गई संपत्ति वापस की जाए। तीसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण और प्रबंधन जारी रहे।
रिपोर्ट में कहा गया कि जब तक इन तीन गंभीर मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, कोई भी बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
ईरान, अमेरिका और इजरायल ने 8 अप्रैल को 40 दिनों की लड़ाई के बाद युद्धविराम पर सहमति जताई थी, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से हुई थी।
युद्धविराम के बाद, ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर किया था, लेकिन उसमें कोई समझौता नहीं हो पाया। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने संघर्ष खत्म करने के लिए अपनी-अपनी शर्तों वाले कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है।
–आईएएनएस
एवाई/पीएम
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