नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भांग की नियंत्रित खेती के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया

Summary :

काठमांडू, 1 नवंबर (आईएएनएस)। नेपाल में साल 1976 में नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत भांग की बिक्री, खेती और सेवन को अपराध घोषित कि‍या गया था। अब नेपाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करने का आदेश द‍िया है। अदालत के आदेश से करीब पांच दशक बाद नेपाल में कानूनी रूप से भांग की खेती और उत्पादन का रास्ता खुल सकता है। साल 1976 में लागू नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत भांग की बिक्री, खेती और सेवन को…

काठमांडू, 1 नवंबर (आईएएनएस)। नेपाल में साल 1976 में नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत भांग की बिक्री, खेती और सेवन को अपराध घोषित कि‍या गया था। अब नेपाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करने का आदेश द‍िया है।

अदालत के आदेश से करीब पांच दशक बाद नेपाल में कानूनी रूप से भांग की खेती और उत्पादन का रास्ता खुल सकता है। साल 1976 में लागू नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत भांग की बिक्री, खेती और सेवन को अपराध घोषित कर दिया गया था।

वर्तमान में भांग की खेती करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर भांग की खेती और उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए जरूरी नियम, मानक और प्रक्रियाएं तैयार करे।

हालांकि, अदालत का फैसला 18 मई 2025 को सुनाया गया था, लेकिन इसका पूरा पाठ कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक किया गया। इसकी वजह यह रही कि पिछले साल 9 सितंबर को जेनजी प्रदर्शनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट में लगी आग के बाद संबंधित दस्तावेज नहीं मिल पाए थे।

अदालत ने कहा कि 1976 का कानून भले ही भांग पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन इसमें औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए नियंत्रित खेती और उत्पादन की कानूनी गुंजाइश भी मौजूद है। अदालत ने पाया कि सरकार की ओर से जरूरी नियम और प्रक्रियाएं नहीं बनाए जाने के कारण इन उद्देश्यों के लिए भांग की खेती और उत्पादन संभव नहीं हो सका।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की व्यावसायिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, उपयोग, बिक्री, वितरण, निर्यात और आयात के लिए लाइसेंस या अनुमति जारी करने हेतु सख्त निगरानी और नियामक व्यवस्था बनाई जाए।

साथ ही यह व्यवस्था अवैध खेती, उत्पादन, निर्माण, बिक्री और वितरण जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने का काम भी करेगी। 1970 के दशक में कानून लागू होने के बाद लोग कानूनी कार्रवाई के डर से भांग की खेती और उत्पादन से दूर रहे।

हाल के वर्षों में नेपाल में औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की अनुमति देने पर चर्चा तेज हुई है। मार्च 2020 में तत्कालीन प्रतिनिधि सभा सदस्य शेर बहादुर तामांग ने एक निजी विधेयक पेश किया था, जिसमें मुख्य रूप से औषधीय उपयोग और निर्यात के लिए मारिजुआना को कानूनी बनाने की मांग की गई थी।

इस प्रस्ताव में लाइसेंस प्राप्त किसानों को भांग उगाने और बेचने की अनुमति देने की बात कही गई थी। हालांकि, यह विधेयक संसद से पारित नहीं हो सका, लेकिन इसके तहत किसान स्थानीय सरकार या संबंधित जिला प्रशासन से लाइसेंस प्राप्त कर खेती कर सकते थे।

आवेदकों को खेती का क्षेत्र बताना होता, खेती में शामिल लोगों की जानकारी देनी होती और यह भरोसा देना होता कि इसका दुरुपयोग नहीं होगा।

इस वर्ष 9 जुलाई को नेपाल की गंडकी प्रांत विधानसभा ने औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को लाइसेंस देने संबंधी एक विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1970 के दशक की शुरुआत तक नेपाल में भांग की खेती और बिक्री कानूनी थी। लेकिन 1960 और 1970 के दशक में पश्चिमी देशों से बड़ी संख्या में हिप्पी नेपाल आने लगे। इसके साथ देश में मारिजुआना और हशीश की मांग भी बढ़ गई और एक बड़ा बाजार विकसित होने लगा। इस बढ़ते कारोबार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा।

देश और विदेश के कई शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ अभियान के दबाव के कारण नेपाल ने भांग की खेती, बिक्री और सेवन को अपराध की श्रेणी में रखा।

आज स्थिति काफी बदल चुकी है। अमेरिका के कई राज्यों में औषधीय उपयोग के लिए कैनाबिस को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, जबकि कुछ राज्यों में मनोरंजन के लिए भी इसके उपयोग की अनुमति है। इसी तरह दुनिया के कई अन्य देशों ने भी चिकित्सा और मनोरंजन दोनों उद्देश्यों के लिए मारिजुआना को कानूनी दर्जा दिया है।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.