वाशिंगटन, 6 नवंबर (आईएएनएस)। साल 2026 में ‘क्वाड’ समूह की गतिविधियों ने यह दिखाया कि अब यह संगठन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट और गंभीर तरीके से काम कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली, मनीला और अटलांटा में हुई विदेश मंत्रियों की तीन अलग-अलग बैठकों के जरिए समूह ने अपनी साझा प्राथमिकताओं को और स्पष्ट किया, वादों को जमीनी स्तर पर लागू किया और आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने पिछले सप्ताह अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इस साल की तीसरी बैठक की। इससे पहले मई में नई दिल्ली और जुलाई में मनीला में बैठकें हो चुकी थीं।
ऑनलाइन पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इन नियमित बैठकों के बावजूद, सबसे ज्यादा ध्यान अभी भी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन पर बना हुआ है। यह सम्मेलन इसी महीने के आखिर में मनीला में होने की उम्मीद है।
इस शिखर सम्मेलन को लेकर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि 2025 में नई दिल्ली में होने वाला क्वाड नेताओं का सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद यह पहला क्वाड नेताओं का सम्मेलन होगा।
इसके अलावा, यह सम्मेलन क्वाड के भविष्य को लेकर चल रही कई अटकलों को भी कम कर सकता है। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा और तकनीकी आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों तथा चीन, रूस और अमेरिका के संभावित प्रभाव क्षेत्रों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच क्वाड की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही अभी तक नेताओं का सम्मेलन नहीं हुआ है, लेकिन 2026 क्वाड के लिए काफी महत्वपूर्ण साल साबित हुआ है। विदेश मंत्रियों की तीन बैठकों में साझा प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया, कई घोषणाओं को अमल में लाया गया और सहयोग के नए क्षेत्रों को जोड़ा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड की भूमिका को लेकर और ज्यादा स्पष्टता आई है। आर्थिक दबाव के खिलाफ अपनी स्पष्ट स्थिति के साथ-साथ, क्वाड देशों द्वारा खुद को -आसियान के समग्र रणनीतिक साझेदार’ बताना भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जुलाई 2026 में मनीला में हुई बैठक में क्वाड देशों ने आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (एओआईपी) को व्यवहारिक रूप से लागू करने के समर्थन की घोषणा की थी। इसमें समुद्री सुरक्षा, सीमा-पार सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकें, मानवीय सहायता और आपदा प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अटलांटा बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में मई 2026 में नई दिल्ली में हुई बैठक में चर्चा किए गए कई नए कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी भी दी गई। इनमें दूसरा ‘क्वाड-एट-सी’ शिप ऑब्जर्वर मिशन, जो सितंबर 2026 में आयोजित हुआ था, और दूसरा इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (आईपीएलएन) टेबलटॉप एक्सरसाइज (टीटीएक्स) शामिल हैं। इस अभ्यास की मेजबानी सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय ने की थी।
–आईएएनएस
एवाई/
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