रियाद, 18 मई (आईएएनएस)। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने इराकी हवाई क्षेत्र से देश की सीमा में घुसे 3 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। सऊदी अरब ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी हमले के प्रयास का जवाब देने के लिए सभी आवश्यक सैन्य कदम उठाए जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि तीन ड्रोन को देश के हवाई क्षेत्र में घुसने के बाद रोककर नष्ट कर दिया गया। ये ड्रोन इराकी हवाई क्षेत्र से आए थे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तुर्की अल-मलिकी ने अपने बयान में कहा कि सऊदी अरब के पास उचित समय और स्थान पर जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। वह देश की संप्रभुता, सुरक्षा व उसके नागरिकों और निवासियों की हिफाजत के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए सभी आवश्यक परिचालन उपाय करेगा और उन्हें लागू करेगा।
पिछले महीने, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रियाद में इराक के राजदूत को तलब किया। मंत्रालय ने इराक के क्षेत्र से छोड़े गए ड्रोन का इस्तेमाल करके किंगडम और खाड़ी के अन्य देशों को लगातार निशाना बनाने वाले हमलों और धमकियों को इसका कारण बताया।
इस बीच, सऊदी अरब ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले के कारण बराका परमाणु ऊर्जा संयंत्र की भीतरी परिधि के बाहर आग लग गई थी।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने दो ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक लिया था, जबकि तीसरा ड्रोन अबू धाबी के अल-धफरा क्षेत्र में स्थित परमाणु सुविधा के पास एक बिजली जनरेटर से टकरा गया। मंत्रालय ने बताया कि ये ड्रोन पश्चिमी सीमा की ओर से आए थे, लेकिन उसने इस बारे में और अधिक विवरण नहीं दिया।
दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण सऊदी अरब में भी अस्थिरता बनी हुई है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए जाने के बाद से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। सऊदी मंत्रालय ने हाल के महीनों में देश के हवाई क्षेत्र में घुसने वाले कई ड्रोन को रोकने और नष्ट करने की घोषणा की।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की थी। इस दौरान ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है, पर हमले किए। साथ ही, उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया।
8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक संघर्ष विराम लागू हुआ, लेकिन इस्लामाबाद में हुई बातचीत से कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष विराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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