यूएई ने तेल कोटा कम होने की वजह से ओपेक छोड़ा: पूर्व राजदूत नवदीप

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नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात ने 1 मई से ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपीईसी) से खुद को अलग करने का ऐलान किया। इस बीच यूएई और मिस्र में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात पिछले पांच सालों से ओपेक कार्टेल छोड़ने के बारे में सोच रहा था। सऊदी अरब के दबदबे वाले समूह द्वारा देश को दिया गया तेल कोटा काफी नहीं माना जा रहा था। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में सूरी ने कहा, “जुलाई 2021 की शुरुआत में ही संकेत थे कि वे उन्हें दिए…

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात ने 1 मई से ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपीईसी) से खुद को अलग करने का ऐलान किया। इस बीच यूएई और मिस्र में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सिंह सूरी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात पिछले पांच सालों से ओपेक कार्टेल छोड़ने के बारे में सोच रहा था। सऊदी अरब के दबदबे वाले समूह द्वारा देश को दिया गया तेल कोटा काफी नहीं माना जा रहा था।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में सूरी ने कहा, “जुलाई 2021 की शुरुआत में ही संकेत थे कि वे उन्हें दिए गए कोटे, लगभग 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन से खुश नहीं थे। उन्होंने कहा था कि अगर कोटा नहीं बढ़ाया गया, तो वे छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।”

फूर्व राजदूत ने आगे कहा, “आखिरकार, कोटा बढ़ाकर 3.4 मिलियन कर दिया गया। लेकिन अब, यूएई ने पिछले कुछ सालों में अपनी उत्पादन क्षमता में काफी निवेश किया है। मुझे लगता है कि अगले साल तक, वे लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन उत्पादन करने की क्षमता तक पहुंच जाएंगे। और जाहिर है, वे सऊदी अरब और दूसरे ओपेक सदस्यों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बिना ऐसा कर पाना चाहते हैं।”

यह पूछे जाने पर कि ओपेक कार्टेल से यूएई के बाहर निकलने का वैश्विक तेल बाजारों पर क्या असर होगा, पूर्व राजदूत सूरी ने कहा, “अभी, बेशक, होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक है और हम सब ऊर्जा की कमी वाले हालात में जी रहे हैं। आज, तेल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इसलिए, आगे के लिए मैं जो कुछ भी कह रहा हूं, वह होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और तेल और गैस के नॉर्मल फ्लो के फिर से शुरू होने पर निर्भर है।”

उन्होंने कहा, “एक बार ऐसा हो जाने पर, मुझे लगता है कि यूएई जैसे देशों से एक्स्ट्रा आउटपुट से तेल की कीमतों को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी और इससे भारत को फायदा होगा। लेकिन, मुझे लगता है कि दूसरा नतीजा यह भी हो सकता है कि ओपेक, कुछ हद तक, पिछले कुछ सालों में तेल की डिमांड और सप्लाई को संतुलन करने में कामयाब रहा है और कम से कम कुछ हद तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने की कोशिश की है। मुझे लगता है कि एक कमजोर ओपेक और ज्यादा देशों का अपने दम पर काम करना तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है। यह कुछ ऐसा है जो हम आगे देख सकते हैं।”

भारत के नजरिए से ईरान-अमेरिका की लड़ाई को लेकर पूर्व राजदूत ने कहा, “हम साफ तौर पर इन डेवलपमेंट्स को लेकर बहुत परेशान हैं। हम देख रहे हैं कि इनका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “ईरान का अपने पड़ोसियों पर जवाबी कदम के तौर पर हमला गैर-कानूनी था। ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेज गैर-कानूनी है और अमेरिका की नाकाबंदी भी गैर-कानूनी है।”

–आईएएनएस

केके/पीएम

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