वाशिंगटन, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के न्याय विभाग ने पाकिस्तान में जन्मे एक व्यक्ति की नागरिकता रद्द करने के लिए सिविल शिकायत दर्ज की है। इस व्यक्ति को एक नाबालिग का यौन शोषण करने और उसे गलत कामों के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था। विभाग का आरोप है कि उसने अपने अपराधों को छिपाकर और झूठी गवाही देकर अमेरिका की नागरिकता हासिल की थी।
यह मामला हसन शेरजिल खान से जुड़ा है, जिसे मई 2013 में अमेरिका की नागरिकता दी गई थी। अभियोजकों के अनुसार, नागरिकता मिलने से पहले भी वह कई सालों से आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। विभाग का तर्क है कि उसकी नागरिकता गैर-कानूनी तरीके से हासिल की गई थी और संघीय कानून के तहत इसे रद्द किया जाना चाहिए।
अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि हसन शेरजिल खान की मुलाकात पीड़ित से 2007 में ऑनलाइन हुई थी, जब वह 11 साल की थी। कई सालों तक, उसने इंटरनेट चैट और वीडियो कॉल का इस्तेमाल करके पीड़ित पर दबाव डाला और उससे अश्लील तस्वीरें मंगवाईं। इसके साथ ही, यौन गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया।
अभियोजकों का कहना है कि अप्रैल 2012 में, हसन अमेरिका से इंग्लैंड गया, जहां पीड़िता रहती थी। वहां उसने पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए। उस समय पीड़िता 15 साल की थी और हसन 24 साल का था।
बाद में अपनी सुनवाई के दौरान, हसन शेरजिल खान ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने अदालत से कहा, “मुझे पता था कि मेरा यह बर्ताव न सिर्फ गैर-कानूनी था, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत था।”
न्याय विभाग ने बताया कि हसन कम से कम 2013 तक ऑनलाइन माध्यम से पीड़िता का शोषण करता रहा। पीड़िता के मना करने के बावजूद भी वह बार-बार उससे संपर्क करता रहा। इसके बावजूद, उसने अगस्त 2012 में अमेरिका की नागरिकता के लिए आवेदन किया। अपने आवेदन और बाद में हुए इंटरव्यू में उसने दावा किया कि उसने कभी कोई ऐसा अपराध नहीं किया है, जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया गया हो। अभियोजकों का कहना है कि उसका यह दावा पूरी तरह से झूठा था।
शिकायत में यह तर्क दिया गया कि आरोपी का नागरिकता के लिए जरूरी नैतिक चरित्र नहीं था। उसने ऐसे अपराध किए थे, जिन्हें नैतिक रूप से गलत माना जाता है और बाद में नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान उसने शपथ लेकर भी झूठ बोला था। अभियोजकों का यह भी आरोप है कि उसने जानबूझकर गलत जानकारी देकर और जरूरी तथ्यों को छिपाकर नागरिकता हासिल की थी। अगर उसने ये तथ्य बता दिए होते, तो उसे नागरिकता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता।
पीड़िता की ओर से अपने साथ हुए शोषण की शिकायत किए जाने के बाद आरोपी को 2015 में गिरफ्तार कर लिया गया था। जनवरी 2016 में, उसने एक नाबालिग को जबरदस्ती करने और बहकाने का अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसे 17 साल जेल की सजा सुनाई गई और वह अभी भी जेल में है।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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