लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर ईरान ने यूएनएससी से पूछे सवाल

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तेहरान, 2 जून (आईएएनएस)। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की इस बात पर कड़ी आलोचना की है कि वह इजरायल को जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह केवल “चिंता व्यक्त करने के चरण से आगे बढ़े” और इजरायल के खिलाफ “दंडात्मक और बाध्यकारी निर्णय” ले। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट ” इजरायली शासन के अपराधों और सजा से उन्हें मुक्त रखने का नतीजा है, वो सरकारों की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, युद्धविराम…

तेहरान, 2 जून (आईएएनएस)। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की इस बात पर कड़ी आलोचना की है कि वह इजरायल को जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है।

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह केवल “चिंता व्यक्त करने के चरण से आगे बढ़े” और इजरायल के खिलाफ “दंडात्मक और बाध्यकारी निर्णय” ले।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट ” इजरायली शासन के अपराधों और सजा से उन्हें मुक्त रखने का नतीजा है, वो सरकारों की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, युद्धविराम को अर्थहीन बनाता है और फिलिस्तीनियों के पवित्र स्थलों का अपमान करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कमजोर और प्रभावहीन निंदा से लागू नहीं होता।”

गरीबाबादी ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेरूत पर बड़े हमले से रोका, केवल अमेरिका की शांति-प्रयास की बात नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका सीधे तौर पर इजरायल की कार्रवाईयों को मैनेज करने में शामिल है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी स्वतंत्र देश की राजधानी पर हमले का निर्णय एक फोन कॉल से बदल सकता है, तो फिर यह प्रश्न उठता है कि महीनों तक संघर्ष विराम उल्लंघन, लेबनान पर हमले, लोगों का विस्थापन और संप्रभुता की धमकियां क्यों जारी रहीं।

दरअसल, सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई। जिसमें फैसला लिया गया कि कोई भी सैन्य टुकड़ी बेरूत नहीं भेजी जाएगी और जो भी रास्ते में हैं, उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। इसी तरह कुछ प्रतिनिधियों के जरिए मेरी हिज्बुल्लाह के साथ भी बहुत अच्छी बातचीत हुई और वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि हमले रोक दिए जाएंगे। दोनों एक दूसरे को निशाना नहीं बनाएंगे।”

वहीं, ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने शीर्ष अधिकारियों के हवाले से कहा, ” लेबनान पर हमलों की वजह से हम मध्यस्थ के जरिए अमेरिका से संदेशों का आदान-प्रदान रोक रहे हैं।”

–आईएएनएस

केआर/

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