नॉर्वे के प्रधानमंत्री, किंग-क्वीन और क्राउन प्रिंस को पीएम मोदी ने दी खास भेंट, हर उपहार में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

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नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों की यात्रा के बाद भारत लौटे। इस यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री मोदी की ओर से नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व को दिए गए उपहारों से मैत्रीपूर्ण संबंधों की झलक दिखाई दी। नॉर्वे के प्रधानमंत्री, किंग-क्वीन और क्राउन प्रिंस को दिए गए ये उपहार भारत की समृद्ध कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर उदाहरण हैं। नॉर्वे की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने नार्वे के प्रधानमंत्री को ‘प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग’ और ‘ऑर्किड पेपरवेट’ भेंट क‍िए। प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट: ये खूबसूरत कलाकृतियां सिक्किम की…

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों की यात्रा के बाद भारत लौटे। इस यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री मोदी की ओर से नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व को दिए गए उपहारों से मैत्रीपूर्ण संबंधों की झलक दिखाई दी। नॉर्वे के प्रधानमंत्री, किंग-क्वीन और क्राउन प्रिंस को दिए गए ये उपहार भारत की समृद्ध कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर उदाहरण हैं।

नॉर्वे की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने नार्वे के प्रधानमंत्री को ‘प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग’ और ‘ऑर्किड पेपरवेट’ भेंट क‍िए।

प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट: ये खूबसूरत कलाकृतियां सिक्किम की धुंध से ढकी घाटियों में पाए जाने वाले असली प्रेस्ड ऑर्किड और फर्न से बनाई गई हैं। ये पूर्वी हिमालय की अद्भुत जैव विविधता का सुंदर प्रतीक हैं। हर फूल और फर्न को स्थानीय कारीगरों ने बहुत ध्यान से चुना और संरक्षित किया है, ताकि सिक्किम के हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य को हमेशा के लिए संजोया जा सके। भारत के पहले ऑर्गेनिक राज्य से आई यह कला पर्यावरण संरक्षण, संतुलित जीवनशैली और पारंपरिक हस्तकला के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है। प्रकृति, टिकाऊ जीवनशैली और फूलों की संस्कृति के प्रति नॉर्वे का प्रेम, सिक्किम की ऑर्किड विरासत से एक खास जुड़ाव बनाता है।

प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा के लिए खास ‘बारीक नक्काशी वाला सेलबोट मॉडल’ लेकर गए।

सेलबोट : यह शानदार चांदी की सेलबोट तारकशी कला का बेहतरीन नमूना है। तारकशी ओडिशा के कटक की 500 साल पुरानी प्रसिद्ध सिल्वर फिलिग्री कला है, जिसके कारण कटक को ‘सिल्वर सिटी’ भी कहा जाता है। इस कला में बहुत पतले चांदी के तारों को मोड़कर और जोड़कर बेहद सुंदर और महीन डिजाइन बनाए जाते हैं, जो कारीगरों की अद्भुत मेहनत और कौशल को दिखाते हैं।

कुशल शिल्पकारों की कड़ी मेहनत के बाद हाथ से बनाई गई यह नौका ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत की याद दिलाती है। यह उन प्राचीन भारतीय व्यापारियों की यात्राओं का प्रतीक भी है, जो समुद्र के रास्ते दूरदराज देशों तक जाते थे। नॉर्वे की समुद्री परंपरा, जो वाइकिंग्स और समुद्री खोजों के लंबे इतिहास से जुड़ी है, इस उपहार से एक खास समानता रखती है। यह उपहार इसलिए भी खास है क्योंकि किंग हेराल्ड पंचम का जीवनभर नौकायन से गहरा संबंध रहा है और उन्होंने ओलंपिक खेलों में भी नॉर्वे का प्रतिनिधित्व किया था।

पीएम मोदी ने नॉर्वे की रानी को भी खास उपहार ‘पाम लीफ पट्टचित्र’ भेंट क‍िया।

‘पाम लीफ पट्टचित्र’ : यह ‘पाम लीफ पट्टचित्र’, जिसे स्थानीय भाषा में ताला पट्टचित्र कहा जाता है, ओडिशा की सबसे पुरानी और बारीक कला परंपराओं में से एक है। कपड़े पर बनने वाली पेंटिंग से अलग, इस कला में खास तरीके से तैयार किए गए ताड़ के पत्तों पर बेहद महीन चित्र उकेरे जाते हैं। यह कला अपनी बारीकी और सुंदरता के लिए जानी जाती है। कई बार इन्हें धागों से जोड़कर फोल्ड होने वाले पैनल या पट्टियों के रूप में बनाया जाता है। इसमें कहानी, लिखावट और पारंपरिक चित्रकारी का सुंदर मेल देखने को मिलता है। इसकी प्राकृतिक बनावट और महीन काम पीढ़ियों से चली आ रही मेहनत और कारीगरों की रचनात्मकता को दर्शाते हैं।

नॉर्वे की सांस्कृतिक विरासत, कहानी कहने की परंपरा और प्रकृति से प्रेरित कला के प्रति प्रेम, पाम लीफ पट्टचित्र से स्वाभाविक रूप से जुड़ता है। जैसे नॉर्डिक पांडुलिपियों और लोक कला में धैर्य और कारीगरी से संस्कृति को संजोया जाता है, वैसे ही यह कला भी परंपरा और समयहीन सुंदरता को जीवित रखती है।

पीएम मोदी ने नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को ‘सूर्य और चंद्रमा थीम वाली कलमकारी पेंटिंग’ भेंट की।

कलमकारी पेंटिंग : यह कलमकारी भारत की एक प्राचीन कला है, जिसमें हाथ से पेंटिंग या ब्लॉक प्रिंटिंग की जाती है। इसमें प्राकृतिक रंगों और बारीक डिजाइनों के जरिए कहानियां और पारंपरिक चित्र उकेरे जाते हैं। इसकी शुरुआत आंध्र प्रदेश में हुई और समय के साथ इसकी दो प्रमुख शैलियां विकसित हुईं, श्रीकालहस्ती शैली, जिसमें बांस की कलम से हाथ से चित्र बनाए जाते हैं और मछलीपट्टनम शैली, जिसमें हाथ से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉक्स का इस्तेमाल होता है।

सूर्य और चंद्रमा वाली कलमकारी पेंटिंग जीवन के संतुलन और दो पहलुओं का प्रतीक मानी जाती है। सूर्य ऊर्जा, जीवन शक्ति और जागरूकता को दर्शाता है जबकि चंद्रमा शांति, संवेदनशीलता और मन की गहराई का प्रतीक है। कलमकारी भारत की वैदिक परंपराओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कहानी कहने वाली कला मानी जाती है। इसमें दिखाए गए आकाशीय प्रतीक एक सार्वभौमिक आकर्षण पैदा करते हैं, जो नॉर्वे के ‘मिडनाइट सन’ की याद दिलाते हैं, जहां रोशनी और अंधेरा एक साथ खूबसूरती से मिलते हैं।

–आईएएनएस

एवाई/पीएम

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