Pakistan-Occupied Kashmir : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण (Pakistan Clashes) बने हुए हैं। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर किए गए लाठीचार्ज के बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं। कई प्रमुख शहरों में ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के समर्थक और पुलिस बल आमने-सामने आ चुके हैं।
11 लोगों के मारे जाने की जानकारी

इन ताजा झड़पों में अब तक कथित तौर पर 11 लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। वहीं 70 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं.
POK में आम नागरिकों पर हुए इस बल प्रयोग का विरोध अब सात समंदर पार ब्रिटेन तक पहुंच गया है, जहां पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन हुए हैं। पूरा विवाद पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए वहां की विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को लेकर भड़का है।
यह हिंसक बवाल रविवार को उस वक्त शुरू हुआ, जब पीओके की कथित शीर्ष अदालत ने इन आरक्षित सीटों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें पूरी तरह से संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं और किसी भी विधायी संशोधन के बिना इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता।
सीटों के आरक्षण के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता
पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों और हिस्सों में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए विधानसभा की 12 सीटें रिजर्व रखने के खिलाफ POK के स्थानीय नागरिकों में लंबे समय से गुस्सा था, जो अब सड़कों पर फूट पड़ा है। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों, विशेषकर रावलकोट (पुंछ जिला) में भीषण हिंसा देखने को मिली है।
पाकिस्तान सरकार द्वारा हाल ही में बैन की गई ‘जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC ban) लगातार इस इलाके के लिए अधिक अधिकारों की मांग कर रही है। कमेटी का मुख्य एजेंडा इन आरक्षित सीटों को पूरी तरह खत्म करना है। उनका तर्क है कि इस आरक्षण नीति की वजह से इस क्षेत्र से बाहर रहने वाले लोगों का दखल POK के आंतरिक मामलों और राजनीति में जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है।
विदेशों तक गूंजा विरोध

हालांकि कमेटी पिछले 3 सालों से लगातार छोटे-बड़े प्रदर्शन करती आ रही है, लेकिन रविवार को भड़की हिंसा का स्तर पहले कभी नहीं देखा गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खूनी संघर्ष में जान गंवाने वालों में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान भी शामिल हैं।
पूरे क्षेत्र में भारी सैन्य मुस्तैदी के बावजूद तनाव चरम पर है, जिससे पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
POK की इस आग की आंच अब ब्रिटेन तक पहुंच चुकी है। लंदन स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन (उच्चायोग) और अन्य शहरों में मौजूद राजनयिक मिशनों के बाहर कश्मीरी प्रवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इकट्ठा होकर भारी विरोध दर्ज कराया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी हुकूमत ने पीओके (POK) में मानवाधिकारों के उल्लंघन की सारी हदें पार कर दी हैं। लंदन के अलावा ब्रैडफोर्ड, बर्मिंघम और मैनचेस्टर जैसे बड़े ब्रिटिश शहरों में भी पाकिस्तान विरोधी रैलियां निकाली जा रही हैं।


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