US body Sanctions Against RSS: अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। दरअसल, धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था USCIRF (यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम) से जुड़े अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं के साथ उच्च स्तरीय मुलाकातों से दूरी बनाने की अपील की है। यह मांग RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले सामने आई है। USCIRF के पाकिस्तानी मूल के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि RSS से जुड़े कई संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसके साथ ही महमूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र करते हुए कहा कि वह RSS के सदस्य हैं। उन्होंने अमेरिकी सरकार से आग्रह किया कि RSS नेताओं के साथ बातचीत करते समय इसे नॉर्मल राजनयिक संबंधों की तरह न देखा जाए। वहीं USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने भी इसी तरह की राय रखी। उनके अनुसार, RSS नेताओं के साथ उच्च स्तर की बैठकें या विशेष राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए, चाहे उनका भारत सरकार से किसी तरह का संबंध क्यों न हो।
Chair @DrMahmood40: “India’s PM Modi is a member of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), an Indian umbrella organization whose sub-groups have perpetrated attacks on religious minorities, incl. Christians & Muslims. Now the RSS leader, Mohan Bhagwat, plans to visit the U.S.”
— USCIRF (@USCIRF) August 19, 2026
RSS नेताओं पर बैन, भागवत के दौरे का विरोध
बता दें, कि जीन मिल्स आगे कहा कि अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर बैन लगाने पर विचार करना चाहिए, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मोहन भागवत के अगस्त के अंत में अमेरिका पहुंचने की योजना बताई जा रही है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग की ओर से किया जा रहा है।
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर कुछ मानवाधिकार संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने उनके दौरे का विरोध करते हुए RSS से जुड़े संगठनों पर मुस्लिम और ईसाई समुदायों के खिलाफ हिंसा के आरोपों का मुद्दा उठाया है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि धार्मिक एकता की बात करने वाला कोई भी कार्यक्रम धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
क्यों अहम है यह मामला?
RSS भारत का एक प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है और बीजेपी के साथ उसके वैचारिक संबंधों को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। वहीं, USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र संघीय सलाहकार संस्था है, जो दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर अमेरिकी सरकार को सलाह देती है।
लेकिन , USCIRF के अधिकारियों की यह मांग अमेरिकी सरकार का आधिकारिक फैसला नहीं है। फिलहाल यह एक सलाह और राजनीतिक दबाव के रूप में सामने आई है। मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे के बीच दिए गए इन बयानों से भारत और अमेरिका के बीच RSS को लेकर एक नया कूटनीतिक और राजनीतिक विवाद जरूर शुरू हो गया है।
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