ओडिशा उच्च न्यायालय ने बुधवार को ओडिशा और इसकी संस्कृति पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा को जमानत दे दी। जमानत के बाद अय्यर मित्रा के रिहाई का रास्ता खुल गया है, जो कि 40 दिनों से झारपाड़ा जेल में बंद थे। सूत्रों के अनुसार, भुवनेश्वर और पुरी में दर्ज दो मामलों में मित्रा को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि निचली अदालत जमानत के शर्त का निर्धारण कर सकता है।
अदालत ने उन्हें ऐसे समय जमानत दी है, जब ओडिशा सरकार ने एक दिन पहले उनके विरुद्ध आरोपों को समाप्त करने का निर्देश दिया था। सरकार ने अय्यर मित्रा की अपील को स्वीकार कर लिया था और उनके विरुद्ध मामले को वापस लेने का फैसला किया था। गृह विभाग ने मंगलवार को अपने बयान में कहा, ‘उनके पक्ष को संज्ञान में लेते हुए, सरकार ने उनके खिलाफ मामलों को नहीं चलाने का निर्णय लिया है, जिसे उनके खिलाफ चलाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही उनके खिलाफ अन्य मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समाप्त करने के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।’
अय्यर मित्रा ने ओडिशा सरकार से बिना किसी मंशा के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफी स्वीकार करने की अपील की थी। ओडिशा विधानसभा ने 17 नवंबर को अय्यर मित्रा को राज्य के विधायकों के खिलाफ दिए बयान पर उनकी ओर से बिना शर्त माफी मांगने के बाद उन्हे माफ कर दिया था। अय्यर मित्रा ने 16 सितंबर को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वे कोणार्क मंदिर की आलोचना करते दिख रहे हैं। बाद में उन्होंने उड़िया संस्कृति और विधायकों के खिलाफ भी अपमानजनक बयान दिया था। इस घटना के बाद, उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय में जमानत की याचिका खारिज होने के बाद 23 अक्टूबर को मित्रा को गिरफ्तार किया गया था।


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