Kumar Sanu Defamation Lawsuit: Kumar Sanu ने अपनी पूर्व पत्नी रीता भट्टाचार्य के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मशहूर सिंगर ने 30 लाख रुपये के हर्जाने और उन इंटरव्यू को हटाने की मांग करते हुए केस दायर किया है, जिनमें कथित तौर पर रीता ने उनके बारे में बुरा-भला कहा था। कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में कानूनी तौर पर कन्फर्म हो गया था। मानहानि के इस मुकदमे की सुनवाई हाई कोर्ट में 17 दिसंबर को होगी।
Kumar Sanu Defamation Lawsuit: Kumar Sanu ने एक्स वाइफ रीता भट्टाचार्य को भेजा लीगल नोटिस

Kumar Sanu ने अपनी याचिका में दावा किया कि सुश्री भट्टाचार्य ने वायरल भयानी और फिल्म विंडो जैसे एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म को इंटरव्यू दिए, जहाँ उन्होंने उनके बारे में अपमानजनक बयान दिए। याचिका में कहा गया है कि भट्टाचार्य ने सिंगर पर प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें भूखा रखने, किचन में ताला लगाने, दूध और मेडिकल केयर न देने और प्रेग्नेंसी के दौरान कोर्ट की कार्यवाही करने का आरोप लगाया।
इंटरव्यू में उन्होंने यह भी दावा किया कि सानू के उनसे शादीशुदा होने के दौरान कई अफेयर थे और उन्होंने अपने परिवार की उपेक्षा की। सितंबर 2025 में, ये इंटरव्यू सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर सर्कुलेट हुए और नेटिज़न्स के बीच चर्चा का विषय बन गए।
अपनी याचिका में, सानू ने दावा किया कि उनकी पूर्व पत्नी द्वारा की गई टिप्पणियों ने 9 फरवरी, 2001 को बांद्रा फैमिली कोर्ट में उनके तलाक की कार्यवाही के दौरान दर्ज सहमति की शर्तों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि इस क्लॉज़ ने यह सुनिश्चित किया था कि भविष्य में कोई भी पक्ष दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाएगा। याचिका में तर्क दिया गया है कि सुश्री भट्टाचार्य के बयानों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ और मानसिक परेशानी हुई।
कुमार सानू ने पूर्व पत्नी के खिलाफ दर्ज किया केस

27 सितंबर को सुश्री भट्टाचार्य को एक कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसमें कहा गया था कि Rita Bhattacharya interviews इंटरव्यू नहीं हटाए गए, तो आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें लिखा था, “हमारे क्लाइंट आपके द्वारा दिए गए मानहानिकारक बयानों की गंभीरता पर ज़ोर देते हैं, और अगर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।”
Bombay High Court case
नोटिस में भट्टाचार्य द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी ज़ोर दिया गया। “आपने, अन्य बातों के अलावा, आरोप लगाया है कि हमारे क्लाइंट ने गर्भावस्था के दौरान आपको खाना नहीं दिया, कि उनके परिवार के सदस्य ‘बदतमीज़’ और ‘असंस्कारी’ हैं, और आपने हमारे क्लाइंट द्वारा अपनाई गई गोद लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है।” याचिका में लिखा था, “इन अपमानजनक टिप्पणियों से सामाजिक और पेशेवर हलकों में, पड़ोसियों के बीच और संभावित व्यावसायिक अवसरों में गलत धारणाएं बनी हैं, जिसके परिणामस्वरूप काफी वित्तीय और प्रतिष्ठा का नुकसान हुआ है।”
वित्तीय नुकसान और हटाने के आदेशों के अलावा, कानूनी नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर प्रतिवादी बयान वापस नहीं लेते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत कार्रवाई की जाएगी।


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