Raakh Become Propaganda Series: प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ ‘राख’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। रिलीज़ के बाद से ही इस सीरिज़ को लेकर दर्शकों के बीच मिले-जुले रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं। जहां एक तरफ कुछ लोग इसकी कहानी और किरदारों की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कई दर्शकों और क्रिटिक्स ने इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
X Review: कहानी को लेकर उठे सवाल
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूज़र्स का कहना है कि सीरीज़ को “सच्ची घटनाओं से प्रेरित” बताया गया है, लेकिन इसमें कहानी को क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर काफी बदल दिया गया है। आरोप है कि निर्देशक ने वास्तविक घटनाओं को अपनी कल्पना के अनुसार दिखाया है। कई यूज़र्स का यह भी कहना है कि सीरीज़ में कुछ सामाजिक और जाति से जुड़े पहलुओं को इस तरह दिखाया गया है कि कहानी का मेन फोकस अपराध से हटकर पहचान, जाति और सामाजिक मुद्दों की ओर शिफ्ट हो जाता है।
Story Of Raakh: ‘राख’ की कहानी क्या है?
Chak De
Section 15
Sherni
Mission Mangal and so many, many more ….Where our filmmakers took ‘real events’ and mangled them with faith and caste to take dishonesty to another level.
This is not creative interpretation; it is selectively sly storytelling.
…And that is… https://t.co/JpEemRwYqq
— Nandini (@NBDwrites) June 18, 2026
‘राख’ को दिल्ली के चर्चित रंगा-बिल्ला हत्याकांड से प्रेरित बताया जा रहा है। क्रिटिक्स के अनुसार, सीरीज़ में अली फज़ल द्वारा निभाए गए मुख्य जांच अधिकारी को दलित समुदाय से दिखाया गया है। वहीं उनके सहयोगी अधिकारी को मुस्लिम और एक पत्रकार किरदार को भी मुस्लिम महिला के रूप में प्रेजेंट किया गया है। इसके अलावा एक अन्य पुलिस अधिकारी को ब्राह्मण पहचान के साथ नेगेटिव रोल में दिखाने की कोशिश की गई है, जिसपर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
Raakh Become Propaganda Series: हिंदुओं में फूट डलवाने की करी गई साजिश?
‘राख’ पहली नहीं…
‘तांडव’ में हिंदू देवताओं का मजाक, ‘दहाड़’ में लव जिहाद पर पर्दा, ‘पाताल लोक’ में हिंदू-सिखों की नकारात्मक छवि
लंबी है Prime Video के वैचारिक एजेंडे की कहानी@immortalsoulin की रिपोर्टhttps://t.co/D43ujmPU7g
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) June 18, 2026
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड या फिल्म इंडस्ट्री ने किसी फिल्म या सीरिज़ में ऐसा किया हो। इससे पहले भी कई फिल्में और सीरिज़ ऐसी आई हैं, जिन्होंने खास तौर पर हिंदु समाज के लोगों में फूट डलवाने के लिए इस तरह के टैक्टिक्स अपनाएं हैं। ऐसी फिल्मों या सीरिज़ में अक्सर हिंदु केरेक्टर को इस तरह से पेश किया जाता है कि वहीं सबसे गलत दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम या कोई पिछड़ा वर्ग इस तरह से दिखाया जाएगा जैसे कि उसने सारी अच्छी चीजें की हो। खास तौर पर जाति में बांटने के लिए अक्सर इस तरह की चीजें पेश की जा चुकी हैं।
अब अगर इस सीरिज़ को कोई ऐसा इंसान देखेगा जो कि फिल्म इंडस्ट्री के इन लोगों के प्रोपेगेंडा के बारे नहीं जानता, तो उसे तो यही लगेगा कि ब्राह्मण लोग अक्सर दलित लोगों पर अपना हुक्म चलाते आए हैं और फिर चाहे दलित पोस्ट में उनसे ऊपर ही क्यों ना हो। लेकिन कोई भी इस तरह की फिल्म या सीरिज़ नहीं बनाएगा, जहां कम्यूनल हार्मनी की बात की जा रही हो। क्योंकि अगर ऐसा कर दिया तो आखिर इन लोगों का प्रोपेगेंडा कैसे पूरी हो पाएगा।
Criticism By Fans: दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर कुछ दर्शकों का मानना है कि किसी भी फिल्म या वेब सीरीज़ में कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटीव बदलाव करना आम बात है। उनका कहना है कि मेकर्स को क्रिएटीव फ्रीडम मिलनी चाहिए ताकि कहानी ज्यादा इफेक्टिव और दिलचस्प बन सके। लेकिन वहीं दूसरी तरफ, कई लोग इसे वास्तविक घटनाओं से भटकाने वाली सीरिज़ मान रहे हैं। उनका तर्क है कि जब किसी प्रोजेक्ट को सच्ची घटनाओं पर आधारित बताया जाता है, तो उसमें तथ्यों के साथ ज्यादा छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
आपको बता दे कि चक दे इससे पहले भी चक दे, सेक्शन 15, शेरनी, मिशन मंगल और ऐसी ही कई फ़िल्मों में फ़िल्ममेकर्स ने ‘असली घटनाओं’ को आस्था और जाति के साथ इस तरह मिलाया कि ये बेईमानी एक नए स्तर पर पहुंच गया। यह क्रिएटिव इंटरप्रिटेशन नहीं है, बल्कि यह सोच-समझकर की गई चालाक कहानी की बयानी है और ठीक इसी वजह से ऐसी फ़िल्मों को सीरियस नहीं लिया जाता। क्योंकि फैंस फ़िक्शन और यहां तक कि पार्शियेलिटी को भी एक्सेप्ट कर सकते हैं, लेकिन वो ‘असली घटनाओं’ के नाम पर जानबूझकर परोसे गए प्रोपेगेंडा को स्वाभाविक तौर पर नकार देते हैं।
इसके अलावा अगर प्राइम पर आने वाली सीरिज़ को लेकर भी बात करें तो ‘राख’ पहली नहीं है, जिसमें जानबूझकर हिंदुओं में फूट डलवाने के लिए जाति का इस्तेमाल किया गया हो। इससे पहले भी ‘तांडव’ में हिंदू देवताओं का मजाक, ‘दहाड़’ में लव जिहाद पर पर्दा, ‘पाताल लोक’ में हिंदू-सिखों की नेगेटिव इमोज और इसके अलावा भी लिस्ट काफी लंबी है Prime Video के आइडियोलॉजिकल एजेंडे की कहानी को लेकर। पर अब धीरे धीरे लोगों की आंखें भी खुल रही है और सोशल मीडिया पर ‘राख’ को बैकलेश मिलना इस बात का सबूत भी है।
Raakh Slammed By Netizens: विवाद और आलोचना

कुछ क्रिटीक्स का यह भी कहना है कि सीरिज़ की कहानी के अंदर जांच में शामिल अधिकारियों के नाम और घटनाओं को नजरअंदाज करते हुए अलग तरह से पेश करना फैंस में भ्रम पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि इस तरह के बदलाव इतिहास और वास्तविक घटनाओं की समझ को इफेक्ट कर सकते हैं।
फिलहाल ‘राख’ को लेकर ऑनलाइन बहस लगातार जारी है। यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियों में क्रिएटिव फ्रीडम की कोई लिमिट होनी चाहिए या फिर मेकर्स को अपने एजेंडा को दिखाने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए।
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