Raakh Slammed By Netizens: प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरिज़ ‘राख’ इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। सीरीज़ को लेकर दर्शकों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोगों ने इसकी कहानी और केरेक्टर की तारीफ करी, जबकि कई यूज़र्स ने आरोप लगाया है कि सीरिज़ में सच्ची घटनाओं से प्रेरित होने वाली कहानी को खुद की इमेजिनेशन के साथ डायरेक्टर ने प्रेजेंट किया है।
X Review: वेब सीरिज़ को लेकर क्या है लोगों की राय?
RAAKH Web Series is leftist PROPOGANDA!#AliFazal plays the investigator, and his character is shown as a DALIT.
His assistant is a MUSLIM, the honest journalist is also a Muslim, while the lazy constable is a BRAHMIN…😂Even though the series is based on the real Billa–Ranga… pic.twitter.com/1BW2cI3x6p
— ABHAY (@CinephileKS) June 17, 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूज़र्स का कहना है कि सीरीज़ में कुछ केरेक्टर और सामाजिक मुद्दों को इस तरह दिखाया गया है कि कहानी का मेन फोकस अपराध से हटकर जाति और सामाजिक पहचान की ओर चला जाता है। क्रिटीक्स का दावा है कि सीरिज़ में दिखाई गई कहानी सच्ची घटनाओं की कहानी से बिल्कुल भी मिलती नहीं है।
Story Of Raakh: क्या है राख की कहानी?
The 1978 Ranga-Billa case involved the brutal kidnapping and murder of teenage siblings Geeta and Sanjay Chopra in Delhi by career criminals Kuljeet Singh (Ranga) and Jasbir Singh (Billa).
The horrific crime shocked the nation, leading to a massive manhunt and the swift… pic.twitter.com/0Jiz0PD5bl
— THE SKIN DOCTOR (@theskindoctor13) June 17, 2026
‘राख’ दिल्ली के चर्चित रंगा-बिल्ला हत्याकांड की कहानी बताई जा रही है। ऐसे में क्रिटीक्स के मुताबिक, सीरिज़ में अली फ़ज़ल द्वारा निभाए गए मेन जांच अधिकारी को दलित जाति का दिखाया गया है, जबकि उनके साथी अधिकारी को मुस्लिम और एक पत्रकार के केरेक्टर को भी मुस्लिम महिला के रूप में दिखाया गया है। वहीं एक और दूसरे पुलिसकर्मी को ब्राह्मण पहचान के साथ नेगेटिव रोल में दर्शाने की कोशिश की गई है।
Criticism By Fans: फैंस ने राख को किया क्रिटीसाइज़
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सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स का तर्क है कि वास्तविक मामले में जांच का नेतृत्व अधिकारियों वी. पी. गुप्ता, राम चंदर और पुलिस आयुक्त जे. एन. चतुर्वेदी जैसे अधिकारियों ने किया था। उनका कहना है कि सीरिज़ में केरेक्टर की कहानी और कुछ घटनाओं में किए गए बदलाव असल सच्चाई से अलग दिखाई देते हैं।
दूसरी ओर, कई दर्शकों का मानना है कि किसी भी फिल्म या वेब सीरीज़ को बेहतरीन बनाने के लिए खुद की ओर से कुछ नई चीज़ें एड करने की फ्रीडम होती है। इसी के साथ सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियों में केरेक्टर और सिचुएशन में बदलाव किया जा सकता है। कई लोगों के मुताबिक, फिल्म मेकर्स अक्सर सामाजिक मुद्दों को जोड़कर कहानी को ज्यादा इंटरस्टिंग बनाने की कोशिश करते हैं।
Raakh Slammed By Netizens: क्या गलत फहमी पैदा करने के लिए बनाई गई सीरिज़?

हालांकि, क्रिटीक्स का कहना है कि जब कोई फिल्म या सीरिज़ खुद को सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताती है, तब ऐतिहासिक तथ्यों और दिखाई गई चीज़ों के बीच बैलेंस बनाए रखना जरूरी हो जाता है। उनका मानना है कि ज्यादा बदलाव दर्शकों के बीच गलत फहमी पैदा कर सकते हैं और सच्ची घटनाओं की समझ से लोगों को मेनिप्यूलेट कर सकते हैं।
फिलहाल ‘राख’ को लेकर ऑनलाइन बहस जारी है। यह विवाद एक बार फिर उस सवाल को सामने लाता है कि सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों और वेब सीरीज़ में क्रिएटिव फ्रीडम की लिमिट क्या होनी चाहिए और सच्ची घटनाओं का प्रेजेंटेशन सही से दिखाना मेकर्स की जिम्मेदारी है या नहीं?


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