Crude Oil Price Rise Over 40%: अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में महज 15 दिनों में 40 प्रतिशत से अधिक भारी उछाल सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति मार्ग को बंद कर दिया है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। युद्ध शुरू होने से पहले, 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थीं और युद्ध के बाद कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई और वे लगभग 103 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। जिससे दुनिया के कई देशों में हड़कंप मच गया है और बजट भी हिल गया है।
Crude Oil Price Rise Over 40%: 41.1 प्रतिशत का उछाल

73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 103 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल होने से 30 अमेरिकी डॉलर की भारी बढ़ोतरी और लगभग 41.1 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। कीमतों में आई तेज उछाल मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने के साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है, जिसमें होर्मुज वैश्विक तेल परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष से संबंधित घटनाक्रम आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे।
Crude Oil Price Hike: 150 डॉलर तक पहुँच सकती है कीमत

कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के बाद वित्तीय बाजारों में चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता को जन्म देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ता रहा और आपूर्ति में बाधाएँ जारी रहीं, तो तेल की कीमतें अस्थिर बनी रह सकती हैं और आने वाले समय में 150 डॉलर के स्तर तक पहुँच सकती हैं।
भारत को सबसे ज्यादा नुकसान
भारत कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर ही सबसे ज्यादा निर्भर रहता है अगर यहां जंग जारी रहती है तो भारत को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है और भारत को दूसरा वैकल्पिक स्रोत तलाशना मुश्किल और महंगा भी हो सकता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत में चिंता भी बढ़ गई है क्योंकि सिर्फ 1 डॉलर की बढ़ोतरी के बाद भारत में 14 हजार करोड़ का तेल आयात बिल बढ़ जाता है और ऐसे समय में लगभग 40 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।


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