ऑडियो से वियरेबल्स तक विस्तार, Mustang पोर्टफोलियो के दम पर गोबोल्ट का 3,000 करोड़ मिशन

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GoBolt-Mustang-Expands Partnership: भारत के तेजी से उभरते वियरेबल्स और ऑडियो ब्रांड्स में शामिल गोबोल्ट ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई विकास रणनीति का खुलासा किया है। कंपनी अब केवल बिक्री बढ़ाने पर नहीं, बल्कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स, बेहतर मुनाफे और मजबूत ब्रांड पहचान पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 800 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज करने के बाद कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक 3,000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुँचना है। नीचे इस नई रणनीति और भविष्य की योजनाओं को आसान भाषा में समझाया गया है। GoBolt-Mustang-Expands Partnership: प्रीमियम रणनीति की ओर…

GoBolt-Mustang-Expands Partnership: भारत के तेजी से उभरते वियरेबल्स और ऑडियो ब्रांड्स में शामिल गोबोल्ट ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई विकास रणनीति का खुलासा किया है। कंपनी अब केवल बिक्री बढ़ाने पर नहीं, बल्कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स, बेहतर मुनाफे और मजबूत ब्रांड पहचान पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 800 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज करने के बाद कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक 3,000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुँचना है। नीचे इस नई रणनीति और भविष्य की योजनाओं को आसान भाषा में समझाया गया है।

GoBolt-Mustang-Expands Partnership: प्रीमियम रणनीति की ओर बड़ा कदम

गोबोल्ट ने अपनी पुरानी छूट-आधारित बिक्री मॉडल से हटकर अब प्रीमियम और मिड-प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करने का फैसला किया है। कंपनी का मानना है कि लगातार भारी डिस्काउंट देने से ब्रांड की वैल्यू कमजोर होती है। इसलिए अब वह ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार कर रही है, जो गुणवत्ता, डिजाइन और बेहतर अनुभव के कारण ग्राहकों को पसंद आएं। इस बदलाव का सीधा असर कंपनी की कमाई और ब्रांड की पहचान पर पड़ेगा। प्रीमियम प्रोडक्ट्स से बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है, जिससे कंपनी को दीर्घकालिक लाभ होगा।

मस्टैंग के साथ मजबूत साझेदारी

गोबोल्ट की तेज़ ग्रोथ में एक बड़ी भूमिका उसकी मशहूर ऑटोमोबाइल ब्रांड Mustang के साथ साझेदारी की है। यह सहयोग अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और कंपनी की प्रीमियम रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। यह साझेदारी सिर्फ नाम के उपयोग तक सीमित नहीं है। मस्टैंग की परफॉर्मेंस और डिजाइन से प्रेरित तत्व अब गोबोल्ट के प्रोडक्ट्स में साफ दिखाई देते हैं।

डिजाइन, मटेरियल और यूजर अनुभव में मस्टैंग की झलक देखने को मिलती है। कंपनी का कहना है कि वह भारत की पहली वियरेबल्स ब्रांड है जिसने मस्टैंग जैसे ग्लोबल ऑटोमोटिव आइकन को ऑडियो और वियरेबल्स इकोसिस्टम से जोड़ा है।

मस्टैंग सीरीज़ के नए प्रोडक्ट्स

मस्टैंग ब्रांड के तहत गोबोल्ट ने हाल ही में तीन नई स्मार्टवॉच, स्टैलियन, रेसर और मसल, लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके अलावा मस्टैंग स्प्रिंट टीडब्ल्यूएस ईयरबड्स भी पेश किए गए हैं। इन प्रोडक्ट्स का मकसद सिर्फ तकनीक देना नहीं, बल्कि ग्राहकों को एक अलग अनुभव प्रदान करना है। कंपनी का मानना है कि मस्टैंग सीरीज़ उसकी प्रीमियम पहचान को और मजबूत करेगी। बाजार में इस सीरीज़ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। उम्मीद है कि मस्टैंग से जुड़े प्रोडक्ट्स की बिक्री अगले चरण में करीब 2 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 12 करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है।

3,000 करोड़ का लक्ष्य

गोबोल्ट के को-फाउंडर वरुण गुप्ता के अनुसार, कंपनी अब 800 करोड़ रुपये के स्तर से आगे बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये के कारोबार की दिशा में बढ़ रही है। उनका कहना है कि यह सिर्फ बिक्री बढ़ाने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक मजबूत और अलग पहचान बनाने की कोशिश है। कंपनी का फोकस ऐसे प्रोडक्ट्स बनाने पर है जो मस्टैंग के डीएनए से प्रेरित हों और ग्राहकों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन सकें। उनका मानना है कि ब्रांड का आत्मविश्वास और व्यक्तित्व उत्पादों के जरिए ग्राहकों तक पहुँचना चाहिए।

ऑडियो और वियरेबल्स में संतुलन

फिलहाल कंपनी की लगभग 70 प्रतिशत कमाई ऑडियो प्रोडक्ट्स से और 30 प्रतिशत वियरेबल्स से आती है। लेकिन आने वाले वर्षों में यह अनुपात बदल सकता है। जैसे-जैसे कंपनी मिड-प्रीमियम और प्रीमियम सेगमेंट में विस्तार करेगी, वियरेबल्स की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। योजना के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 तक प्रीमियम और मिड-प्रीमियम प्रोडक्ट्स कुल बिक्री का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं। इससे कंपनी को बेहतर मुनाफा मिलेगा और उसकी प्रीमियम ब्रांड इमेज और मजबूत होगी।

ऑफलाइन बाजार में विस्तार

अब तक गोबोल्ट की बिक्री का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आता रहा है। लेकिन कंपनी ऑफलाइन बाजार में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में ऑफलाइन बिक्री की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी रिटेल नेटवर्क मजबूत कर रही है। इससे छोटे शहरों में भी प्रीमियम प्रोडक्ट्स की पहुँच आसान होगी।

गुणवत्ता पर जोर, कीमत की होड़ से दूरी

स्मार्टवॉच और ऑडियो बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। कई ब्रांड कम कीमत पर प्रोडक्ट्स पेश कर रहे हैं। लेकिन गोबोल्ट ने कीमतों की दौड़ में शामिल न होकर गुणवत्ता और उपयोगिता पर ध्यान देने का फैसला किया है। को-फाउंडर तरुण गुप्ता के अनुसार, कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स बनाना चाहती है जिन्हें लोग लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहें। हर डिजाइन और तकनीकी फैसला सोच-समझकर लिया जा रहा है, ताकि प्रोडक्ट मजबूत, भरोसेमंद और रोजमर्रा के उपयोग के लिए उपयुक्त हो।

वैश्विक विस्तार की योजना

वर्ष 2030 तक गोबोल्ट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान मजबूत करना चाहता है। कंपनी की योजना अमेरिका, यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया में विस्तार करने की है। आने वाले समय में कंपनी संतुलित विस्तार, प्रीमियम पोजिशनिंग और मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो पर ध्यान देगी। लक्ष्य यह है कि बिना ज्यादा छूट दिए भी बिक्री और ब्रांड ग्रोथ जारी रहे।

आगे की दिशा

गोबोल्ट का मानना है कि भारत के वियरेबल्स बाजार का अगला दौर उन्हीं कंपनियों के नाम होगा, जो बड़े पैमाने के साथ गुणवत्ता और मजबूती भी दे सकें। मस्टैंग पोर्टफोलियो को कंपनी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानती है। प्रीमियम फोकस, बेहतर डिजाइन और संतुलित विस्तार के जरिए गोबोल्ट आने वाले वर्षों में भारतीय और वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।