इन 3 कारणों से गई जॉब! अमेरिकी कंपनी Oracle ने 30000 लोगों की छटनी का बनाया प्लान, 12000 भारतीय शामिल

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Oracle Layoffs Big Update: अमेरिका की बड़ी टेक कंपनी Oracle में हाल ही में हुई बड़े पैमाने की छंटनी ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी लगभग 30,000 कर्मचारियों को निकालने की योजना बना रही है, जिनमें से करीब 12,000 लोग भारत से हैं। पहली नजर में यह सिर्फ खर्च घटाने का कदम लग सकता है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा गहरी है। यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का संकेत है। अब कंपनियां इंसानों पर कम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन पर ज्यादा भरोसा करने लगी हैं।…

Oracle Layoffs Big Update: अमेरिका की बड़ी टेक कंपनी Oracle में हाल ही में हुई बड़े पैमाने की छंटनी ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी लगभग 30,000 कर्मचारियों को निकालने की योजना बना रही है, जिनमें से करीब 12,000 लोग भारत से हैं। पहली नजर में यह सिर्फ खर्च घटाने का कदम लग सकता है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा गहरी है।

यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का संकेत है। अब कंपनियां इंसानों पर कम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन पर ज्यादा भरोसा करने लगी हैं।

Oracle Layoffs Big Update: टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव

पिछले कुछ सालों में टेक कंपनियों का काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां बड़ी टीमों की जरूरत होती थी, वहीं अब कम लोग ज्यादा काम कर पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है AI और मशीन लर्निंग का बढ़ता इस्तेमाल। Oracle भी खुद को एक पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनी से बदलकर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में ले जा रही है। यही कारण है कि कंपनी अपने संसाधनों को नई तकनीकों में निवेश कर रही है और पुराने सिस्टम्स पर निर्भरता कम कर रही है।

Oracle Layoffs 2026: सिर्फ कॉस्ट कटिंग नहीं, बड़ा स्ट्रैटेजिक फैसला

  • इस छंटनी को अगर केवल खर्च कम करने का तरीका माना जाए, तो यह अधूरी समझ होगी।
  • असल में कंपनियां अब अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल रही हैं।
  • AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी में निवेश करना बेहद महंगा होता है।
  • बड़े डेटा सेंटर बनाना, महंगे GPU चिप्स खरीदना, बिजली और कूलिंग सिस्टम का खर्च उठाना, इन सबमें अरबों डॉलर लगते हैं।
  • ऐसे में कंपनियां अपने खर्च को संतुलित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं।
  • यानी जो पैसा पहले सैलरी पर खर्च होता था, अब वह टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाया जा रहा है।

ऑटोमेशन ने बदल दिया खेल

  • ऑटोमेशन आज के समय में सबसे बड़ा गेम-चेंजर बन चुका है।
  • पहले एक बड़े डेटाबेस को संभालने के लिए पूरी टीम की जरूरत होती थी, लेकिन अब वही काम ऑटोमेटेड सिस्टम्स कर रहे हैं।
  • Oracle का Autonomous Database इसका अच्छा उदाहरण है।
  • यह सिस्टम खुद अपडेट होता है, खुद सिक्योरिटी संभालता है और खुद ही अपनी परफॉर्मेंस सुधारता है।
  • इसका सीधा असर यह है कि जिन कामों के लिए पहले 10 लोगों की जरूरत होती थी, अब वही काम 2-3 लोग और एक AI सिस्टम मिलकर कर सकते हैं।

What is Autonomous Database: ऑटोनोमस डेटाबेस क्या है?

What is Autonomous Database
What is Autonomous Database (Source: Social Media)
  • ऑटोनोमस डेटाबेस एक ऐसा स्मार्ट सिस्टम है जो बिना ज्यादा मानव हस्तक्षेप के खुद काम करता है।
  • इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल होता है।
  • यह सिस्टम अपने आप अपडेट होता है, सिक्योरिटी खामियों को ठीक करता है, डेटा का बैकअप लेता है और सिस्टम की स्पीड को बेहतर बनाता है।
  • अब इसमें AI Vector Database जैसी नई तकनीक भी जुड़ गई है, जो सिर्फ डेटा स्टोर नहीं करती बल्कि उसे समझ भी सकती है।
  • यह टेक्स्ट, इमेज और वीडियो जैसे डेटा में पैटर्न पहचान सकती है और बेहतर तरीके से सर्च कर सकती है।

कोडिंग और सपोर्ट जॉब्स पर असर

  • AI का असर सिर्फ डेटाबेस तक सीमित नहीं है।
  • कोडिंग, टेस्टिंग और सपोर्ट जैसे कामों में भी तेजी से बदलाव आ रहा है।
  • आज AI टूल्स कोड लिख सकते हैं, गलतियां ढूंढ सकते हैं और सिस्टम की निगरानी भी कर सकते हैं।
  • क्लाउड सिस्टम अपने आप स्केल हो जाते हैं और कई बार समस्याओं को खुद ही ठीक कर लेते हैं।
  • इससे कंपनियों को बड़ी टीम रखने की जरूरत कम हो रही है।
  • यही कारण है कि अब “कम लोग, ज्यादा काम” वाला मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है।

किन जॉब्स पर सबसे ज्यादा खतरा?

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन नौकरियों पर पड़ रहा है, जिनमें बार-बार एक जैसा काम करना होता है।

जैसे:

  • डेटाबेस एडमिन
  • सपोर्ट इंजीनियर
  • टेस्टिंग रोल्स
  • बेसिक कोडिंग जॉब्स
  • पहले माना जाता था कि सिर्फ एंट्री-लेवल जॉब्स खतरे में हैं, लेकिन अब मिड और सीनियर लेवल की नौकरियां भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
  • जब AI सिस्टम खुद डिजाइन और ऑप्टिमाइजेशन करने लगे, तो कंपनियों को कम लेकिन ज्यादा कुशल लोगों की जरूरत होती है।

कर्मचारियों की जगह कौन ले रहा है?

  • यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है कि जिन लोगों की नौकरी जा रही है, उनकी जगह कौन ले रहा है।
  • जवाब साफ है, AI और हाई-स्किल्ड इंजीनियर।
  • अब कंपनियां बड़ी टीम की बजाय छोटी लेकिन ज्यादा सक्षम टीम बनाना चाहती हैं।
  • ऐसे लोग जिनके पास कई स्किल्स हों और जो AI टूल्स का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
  • भविष्य में एक इंजीनियर वही काम करेगा, जो पहले कई लोग मिलकर करते थे।

सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं

  • यह बदलाव केवल Oracle तक सीमित नहीं है। दुनिया की लगभग सभी बड़ी टेक कंपनियां इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
  • फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ कंपनियों में यह बदलाव धीरे हो रहा है और कुछ में तेजी से।
  • Oracle का मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यहां यह बदलाव ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

कमाई के बावजूद छंटनी क्यों?

  • सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह छंटनी किसी आर्थिक संकट की वजह से नहीं हो रही है।
  • कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन फिर भी कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं।
  • इसका कारण यह है कि भविष्य में उन्हें उतने लोगों की जरूरत नहीं होगी।
  • यानी कंपनियां अभी से खुद को आने वाले समय के हिसाब से तैयार कर रही हैं।

आगे क्या होगा?

  • यह समझना जरूरी है कि IT सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है।
  • जो लोग नई तकनीकों जैसे AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा साइंस के साथ खुद को अपडेट करेंगे, उनके लिए अवसर बढ़ेंगे।
  • लेकिन जो लोग पुराने तरीकों पर टिके रहेंगे, उनके लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।