धोखाधड़ी के चलते सेबी ने 2 ऑपरेटर्स को किया बैन, 4.83 करोड़ रुपए लौटाने का दिया आदेश

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निवेशकों से धोखाधड़ी, सेबी ने 4.83 करोड़ लौटाने का दिया आदेश

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शिवप्रसाद पट्टिया और अलकेश नरवरे को निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप में तीन साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी ने उन्हें 45 दिनों के भीतर 4.83 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया और 25-25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। धोखाधड़ी में एल्गो ट्रेडिंग का दुरुपयोग शामिल था।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दो ऑपरेटर्स शिवप्रसाद पट्टिया और अलकेश नरवरे को निवेशकों से धोखाधड़ी करने के चलते तीन साल के लिए बाजार से बैन कर दिया गया है।

सेबी के आरोपों के मुताबिक, इन दोनों ऑपरेटर्स ने बिना लिक्विडिटी वाले स्टॉक ऑप्शंस में आर्टिफिशियल तरीके से वॉल्यूम को पैदा करके निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।

नियामक ने दोनों ऑपरेटर्स को 45 दिनों के भीतर 4.83 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया है।

शिवप्रसाद पट्टिया और अलकेश नरवरे पर सेबी एक्ट, 1992 के सेक्शन 15एचए के तहत कैपिटल मार्केट रेगुलेटर ने 25-25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

सेबी ने आदेश में कहा, “दोनों को इस आदेश की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए प्रतिभूति बाजार तक पहुंचने और प्रतिभूतियों (म्यूचुअल फंड की इकाइयों सहित) को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीदने, बेचने या अन्य लेनदेन करने या किसी भी तरह से प्रतिभूति बाजार से जुड़ने से प्रतिबंधित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, उन्हें अपने म्यूचुअल फंड, शेयर, प्रतिभूतियों सहित संपत्तियों को डीमैट और भौतिक रूप में बेचने (केवल पैसा लौटाने के उद्देश्य को छोड़कर) से रोक दिया गया है।

एनएसई को निवेशकों से कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कहा गया कि उन्होंने कुछ व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्यों के साथ एल्गो/सॉफ्टवेयर ट्रेडिंग के लिए अपने क्रेडेंशियल्स को अच्छे मुनाफे के लालच में साझा किया था, लेकिन बाद में उनके ट्रेडिंग खातों में ट्रेड किए गए, जिसके परिणामस्वरूप लाखों का नुकसान हुआ।

उपरोक्त अलर्ट और शिकायतों के आधार पर, सेबी ने निवेशकों के ऑनलाइन ट्रेडिंग किट के कथित दुरुपयोग में पटिया और नरवारे के नेतृत्व वाली संस्थाओं के एक समूह की जांच की, जिसमें एल्गो/सॉफ्टवेयर-आधारित ट्रेडिंग से गारंटीड रिटर्न का वादा किया गया और अवैध ‘आउट ऑफ द मनी’ (ओटीएम) स्टॉक ऑप्शंस में धोखाधड़ी और हेरफेर करने वाले ट्रेडों को अंजाम दिया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य अनजान निवेशकों/शिकायतकर्ताओं से फंड को उनके द्वारा नियंत्रित या प्रबंधित फ्रंट संस्थाओं में स्थानांतरित करना था।

सेबी ने आरोप लगाया कि एक योजना तैयार की गई थी जिसके तहत ऑपरेटरों ने निवेशकों को बाजार में निवेश करने के लिए लुभाने के लिए कॉल करने वालों को नियुक्त किया और गारंटीड रिटर्न का वादा किया।

निवेशकों को इन कॉल करने वालों से लगातार कॉल और संदेश मिले। कॉल करने वालों ने एल्गो ट्रेड या स्वचालित सॉफ्टवेयर ट्रेड के माध्यम से गारंटीड लाभ के बहाने निवेशकों से संपर्क किया।

ऑपरेटरों ने निवेशकों को विश्वास में लेने के बाद, उनके लॉग-इन क्रेडेंशियल प्राप्त किए और फिर स्टॉक ऑप्शन पर इस तरह से दांव लगाया कि निवेशकों को प्रीमियम का नुकसान उठाना पड़ा।

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