स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक होटल सयाजी, रायपुर में तीन दिवसीय राज्य-स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यूनिसेफ ने यह प्रशिक्षण समग्र शिक्षा के सहयोग से आयोजित किया, जबकि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी (SIMHA) ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर दिया गया जोर
बच्चों के सीखने, शिक्षा और समग्र विकास में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेष रूप से किशोरावस्था की शुरुआती अवधि विकास और सीखने का एक अहम चरण है, जिसमें बच्चे कई बदलावों, अवसरों और चुनौतियों से गुजरते हैं। ऐसे में स्कूल और शिक्षक बच्चों को सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बेहतर समर्थन देने के लिए शिक्षकों और व्याख्याताओं की समझ एवं क्षमता को मजबूत करना था।
तनाव के संकेत पहचानने और बच्चों को सहयोग देने की मिली जानकारी

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने बच्चों की भावनाओं को समझने और पहचानने, तनाव के संकेतों को पहचानने तथा उससे निपटने के सरल तरीके अपनाने के बारे में सीखा। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों की खूबियों और क्षमताओं को पहचानने एवं प्रोत्साहित करने, कक्षा में सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को उपयुक्त सहायता सेवाओं से जोड़ने (रेफरल) के तरीकों पर भी जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण में सहभागी और गतिविधि-आधारित पद्धति अपनाई गई, जिसमें समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और अनुभवों के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।
बस्तर संभाग के 7 जिलों और धमतरी के शिक्षकों ने लिया हिस्सा
प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों और धमतरी जिले से चयनित शिक्षकों एवं व्याख्याताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे और स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे। इस पहल से राज्य के अधिकाधिक स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण विकसित करने में मदद मिलेगी।
बच्चों पर पढ़ाई और करियर का दबाव कम करना जरूरी: श्री कौशिक
श्री कौशिक, उप संचालक, समग्र शिक्षा ने कहा, “वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। आज हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है। इसके कारण बच्चों पर पढ़ाई और करियर को लेकर काफी दबाव रहता है। ऐसे में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होना बहुत ज़रूरी है, ताकि वे बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार अपने भविष्य और करियर का निर्माण कर सकें।”
स्कूल में हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए: सीमा कुमार
सीमा कुमार, प्रमुख, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड ऑफिस ने कहा, “हर बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। उसे यह एहसास होना चाहिए कि वह इस परिवेश का अभिन्न हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग (MHPSS) देखभाल की एक सतत प्रक्रिया है, जो स्कूल, परिवार और समुदाय को आपस में जोड़ती है। छत्तीसगढ़ में बच्चे की मातृभाषा सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।”
मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर साथ-साथ ध्यान देना जरूरी: रवि राज दयाल
श्री रवि राज दयाल, शिक्षा विशेषज्ञ, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ ने कहा, “सीखने के परिणामों में सुधार और बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देना, दोनों प्रयास साथ-साथ चलने चाहिए। हमारे स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग प्रदान करने वाले स्थान भी बन सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के क्षेत्र में शिक्षकों की क्षमता मजबूत करना यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि प्रत्येक बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिले।”


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