Ministry of Tourism : देश में पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और प्रमुख पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 23 राज्यों में 40 आइकॉनिक पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में 3,295.76 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं को 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण के आधार पर मंजूरी दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। पर्यटन मंत्रालय की ओर से राज्यों को विशेष सहायता योजना SASCI-Development of Iconic Tourist Centres to Global Scale के तहत परियोजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे।
बता दें कि परियोजनाओं के चयन में पर्यटन स्थल तक कनेक्टिविटी, मौजूदा पर्यटन इको-सिस्टम, पर्यटकों की वहन क्षमता, उपयोगिता सेवाओं की उपलब्धता, परियोजना का प्रभाव और संभावित आर्थिक लाभ जैसे विभिन्न मानकों को ध्यान में रखा गया। इन परियोजनाओं से पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने, पर्यटकों के खर्च में वृद्धि और निजी निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन पर्यटन केंद्रों को विकसित करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी गति मिलेगी।
कर्नाटक में दो प्रमुख परियोजनाएं
स्वीकृत 40 परियोजनाओं में कर्नाटक की दो परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें बेंगलुरु के तातागुनी स्थित रोएरिख और देविका रानी एस्टेट में इकोटूरिज्म एवं सांस्कृतिक हब विकसित करने के लिए 99.17 करोड़ रुपये तथा बेलगावी में सावदत्ती यल्लम्मागुड्डा के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में गांडीकोटा किले और गॉर्ज अनुभव तथा राजमहेंद्रवरम में अखंड गोदावरी परियोजना, असम में गुवाहाटी स्थित राज्य चिड़ियाघर-सह-बॉटनिकल गार्डन और रंग घर का सौंदर्यीकरण, बिहार में मत्स्यगंधा झील और करमचट इको-टूरिज्म एवं एडवेंचर हब जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। गोवा में छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय और पोरवोरिम टाउनस्क्वायर, गुजरात में केरली (मोकरसागर) इकोटूरिज्म डेस्टिनेशन तथा धोर्डो में टेंटेड सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर को भी योजना में शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पर्यटन स्थलों पर जोर
उत्तर प्रदेश में आगरा जिले के बटेश्वर के विकास के लिए 74.05 करोड़ रुपये और श्रावस्ती में एकीकृत बौद्ध पर्यटन विकास के लिए 80.24 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। राजस्थान में जयपुर के आमेर-नाहरगढ़ और आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए 49.31 करोड़ रुपये तथा जल महल के विकास के लिए 96.61 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हैं।
मध्य प्रदेश में ओरछा को विकसित करने के लिए 99.92 करोड़ रुपये और भोपाल में अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के लिए 99.38 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। पंजाब में शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की स्मृति में खटकड़ कलां स्थित हेरिटेज स्ट्रीट के विकास के लिए 53.45 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए SASCI के दिशा-निर्देशों में संशोधन के बाद नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश को पर्यटन परियोजनाओं के लिए 250-250 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मंजूर की गई है। तीनों राज्यों को कुल 750 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत और जारी की जा चुकी है
परियोजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम
सरकार ने पर्यटन परियोजनाओं की निगरानी के लिए Program Management Information System (PMIS) भी विकसित किया है। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं के तहत चल रही परियोजनाओं की जानकारी, प्रगति, रिपोर्टिंग और समन्वय को डिजिटल रूप से संचालित किया जा रहा है। परियोजनाओं की निगरानी के लिए केंद्रीय स्तर पर Central Sanctioning and Monitoring Committee (CSMC) और Mission Directorate (MD) जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनमें संस्कृति, आवास एवं शहरी कार्य, नागरिक उड्डयन, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, बंदरगाह, पर्यावरण एवं वन, ग्रामीण विकास, रेलवे तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सहित संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, परियोजनाओं की DPR में आवश्यक वैधानिक मंजूरियों, पर्यटकों की वहन क्षमता, हितधारकों से परामर्श तथा परियोजनाओं के दीर्घकालिक और टिकाऊ संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था को भी शामिल करना अनिवार्य किया गया है।



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