Cape Town : दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 12 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (सीपीसी) के दूसरे दिन भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। सम्मेलन के दौरान समावेशी और निष्पक्ष व्यापार, आर्थिक असमानता, संसदीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता तथा दिव्यांगजनों के लिए सुगम संसद जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने ‘विविध अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रमंडल और उससे बाहर असमानता एवं अविकास की चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर-संसदीय संवाद’ विषय पर आयोजित मुख्य सत्र में हिस्सा लिया।
उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की नेशनल काउंसिल ऑफ प्रोविंसेज (एनसीओपी) की अध्यक्ष रेफिल्वे मत्श्वेनी-त्सिपाने के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान दोनों पक्षों ने साझा संसदीय हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच संसदीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।महिला सांसदों की भागीदारी और समावेशिता पर जोर
उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने ‘अंतरपीढ़ीगत समानता : संसदीय लोकतंत्र का भविष्य’ विषय पर राष्ट्रमंडल महिला सांसद (सीडब्ल्यूपी) सत्र की अध्यक्षता की। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सीडब्ल्यूपी, सीपीए स्मॉल ब्रांचेज और राष्ट्रमंडल दिव्यांग सांसद समूह (सीपीडब्ल्यूडी) के संयुक्त कार्यशाला सत्र की अध्यक्षता की। इस कार्यशाला का विषय ‘संसाधनों की कमी से जूझ रही संसदों में समावेशिता के उपायों को लागू करना’ था। लोकसभा सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी ने ‘सभी के लिए कानून निर्माण : संसदीय प्रक्रियाओं, कार्यप्रणालियों और नीतियों में लैंगिक मुख्यधारा को शामिल करना’ विषय पर आयोजित सत्र में पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया।
समावेशी और निष्पक्ष व्यापार तथा आर्थिक विकास पर हुई चर्चा के दौरान पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत के अनुभवों और किसानों एवं उत्पादकों के लिए ऋण तथा संस्थागत सहायता तक पहुंच बेहतर बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
लोकसभा सांसद कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी ने खुले, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।


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