तकनीक की तरक्की के साथ लोगों की निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी : उपराज्यपाल

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Delhi News : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक तेजी से दुनिया बदल रही हैं, लेकिन तकनीक की इस दौड़ में लोगों की निजता, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नई तकनीक विकसित करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना भी है कि उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के फैसले लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए तकनीकी दक्षता के साथ नैतिकता और जिम्मेदारी का होना भी जरूरी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी…

Delhi News : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक तेजी से दुनिया बदल रही हैं, लेकिन तकनीक की इस दौड़ में लोगों की निजता, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नई तकनीक विकसित करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना भी है कि उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के फैसले लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए तकनीकी दक्षता के साथ नैतिकता और जिम्मेदारी का होना भी जरूरी है।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईआईटी-दिल्ली) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि तकनीकी विकास के साथ उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों को समझना भी आवश्यक है। समारोह में माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के अध्यक्ष राजीव कुमार, संस्थान के प्रबंधन बोर्ड और अकादमिक परिषद के सदस्य, शिक्षक, अभिभावक तथा विद्यार्थी मौजूद रहे।

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि एआई, एडवांस कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीक अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी के दैनिक जीवन तक बड़े बदलाव ला रही हैं। इन बदलावों से नए अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन तकनीक विकसित करने वालों की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नवाचार की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होनी चाहिए कि उससे लोगों का जीवन कितना बेहतर हुआ। तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी और सुलभ हो।

बदलती तकनीक के साथ खुद को बदलना सीखें युवा

तरनजीत सिंह संधू ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री हासिल करने का मतलब पढ़ाई पूरी हो जाना नहीं है। आने वाले वर्षों में तकनीक बदलेगी, रोजगार के नए क्षेत्र सामने आएंगे और कई पुराने पेशों का स्वरूप बदल जाएगा। ऐसे में लगातार नई चीजें सीखने, पुरानी धारणाओं को छोड़ने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता ही युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों पर काम करने और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर जटिल समस्याओं का समाधान तलाशने की सलाह दी।

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टैलेंट, टेंपरामेंट और टेक्नोलॉजी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो केवल नई तकनीक विकसित न करें, बल्कि स्वतंत्र सोच और बेहतर निर्णय क्षमता के साथ देश की चुनौतियों का समाधान भी खोजें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य वैज्ञानिक प्रगति, मजबूत संस्थानों और जिम्मेदार नागरिकों के योगदान से ही पूरा हो सकेगा। इसमें शोध, उद्योग, उद्यमिता और सार्वजनिक सेवा से जुड़े युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

Sumant Chaudhary