कोयला घोटाला मामले में बड़ा फैसला, पूर्व कोयला सचिव गुप्ता समेत तीन अधिकारी बरी

Summary :

निदेशक मनोज कुमार जायसवाल को दोषी ठहराया

पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता; पूर्व संयुक्त सचिव, कोयला, के.एस. क्रोफा; और तत्कालीन निदेशक, कोयला आवंटन, के.सी. समारिया को बरी कर दिया। मामले में आरोप यह था कि जेआईसीपीएल ने पात्रता प्राप्त करने और अज्ञात लोक सेवकों के साथ मिलीभगत करके अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए अपने आवेदन पत्र में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को झारखंड में महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित एक मामले में पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता; पूर्व संयुक्त सचिव, कोयला, के.एस. क्रोफा; और तत्कालीन निदेशक, कोयला आवंटन, के.सी. समारिया को बरी कर दिया। राऊज एवेन्यू अदालत ने कंपनी जस इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड (जेआईसीपीएल) और उसके तत्कालीन निदेशक मनोज कुमार जायसवाल को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के अपराध के लिए दोषी ठहराया। विशेष न्यायाधीश संजय बंसल 8 जुलाई को सजा की अवधि पर दलील सुनेंगे। निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटन के मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के संदर्भ पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के बाद यह मामला दर्ज किया गया था। मामले में आरोप यह था कि जेआईसीपीएल ने पात्रता प्राप्त करने और अज्ञात लोक सेवकों के साथ मिलीभगत करके अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए अपने आवेदन पत्र में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था।

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कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए अपने दावे को बढ़ाने के लिए जेआईसीपीएल ने “धोखेबाजी” से दावा किया कि यह इनर्शियल आयरन एंड स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और आईएल एंड एफएस ग्रुप द्वारा प्रबंधित एक विशेष प्रयोजन के लिए बनी कंपनी (एसपीवी) है। इस धोखे के बिना कंपनी केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की सिफारिश के लिए पूर्व-योग्य नहीं होती।

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने आपराधिक साजिश के तहत जानबूझकर और उद्देश्यपूर्ण तरीके से जेआईसीपीएल द्वारा तथ्यों को छिपाने से संबंधित दस्तावेजों की जांच नहीं की और इस तरह निजी कंपनी को महुआगढ़ी कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनुचित लाभ प्राप्त करने में मदद की।

दिसंबर 2016 में, ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 120 बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए मामले में आरोप तय किए थे।

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