Birsa Munda Inspirational History: भगवान बिरसा मुंडा भारत के इतिहास में एक विशिष्ट एवं प्रेरणादायी स्थान रखते हैं। ‘धरती आबा’ के रूप में पूजनीय बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे बल्कि स्वाभिमान, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जागरण के प्रतीक थे’ यह बात दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘भगवान बिरसा मुंडा, जनजातीय भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं संग्रहालयों में उनका प्रतिनिधित्व’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।
म्यूजियम्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में संग्रहालय विशेषज्ञों, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, विद्वानों व शोधकर्ताओं ने भाग लिया। संगोष्ठी में भगवान बिरसा मुंडा की स्थायी विरासत, जनजातीय भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण व जनजातीय धरोहर के संरक्षण और प्रस्तुतीकरण में संग्रहालयों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
अपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि बिरसा मुंडा का आंदोलन केवल औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक संस्थाओं और स्वदेशी जीवन-पद्धति की रक्षा का एक सशक्त प्रयास भी था। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब जनजातीय समुदाय आर्थिक शोषण, सामाजिक विघटन और परंपराओं के क्षरण का सामना कर रहे थे, बिरसा मुंडा ने उनमें आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का नया संचार किया। उनके अनुसार बिरसा मुंडा से जुड़ा सांस्कृतिक पुनर्जागरण जनजातीय समुदायों में उनके इतिहास, ज्ञान-परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति विश्वास को पुनर्स्थापित करने का प्रयास था, जिसने यह सिद्ध किया कि अधिकारों की रक्षा और संस्कृति का संरक्षण परस्पर गहराई से जुड़े हुए हैं।
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