ब्रिक्स सम्मेलन में एक ट्रिलियन डाॅलर पर दांव, जुटेंगे दुनियाभर के दिग्गज

Summary :

Delhi News/सतेन्द्र त्रिपाठी : एक सदी पहले, महात्मा गांधी ने दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य से कहा था कि एक दिन भारत अपना भविष्य खुद तय करेगा और आज दुनिया की आधी आबादी भारत में अपना भविष्यतय करने के लिए एकत्रित हो रही है। 12-13 सितंबर को दिल्ली से आयोजित होने जा रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दुनिया में बज रहे भारत के डंके का साक्ष्य बनने जा रहा है। महात्मा गांधी का ‘स्वराज’ कभी सिर्फ ‘अपना शासन’ नहीं था, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भरता’ थी। लोगों का यह अधिकार की वे अपने हाथों से निर्माण करें। उनका मानना था कि लोग अपनी…

Delhi News/सतेन्द्र त्रिपाठी : एक सदी पहले, महात्मा गांधी ने दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य से कहा था कि एक दिन भारत अपना भविष्य खुद तय करेगा और आज दुनिया की आधी आबादी भारत में अपना भविष्यतय करने के लिए एकत्रित हो रही है। 12-13 सितंबर को दिल्ली से आयोजित होने जा रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दुनिया में बज रहे भारत के डंके का साक्ष्य बनने जा रहा है। महात्मा गांधी का ‘स्वराज’ कभी सिर्फ ‘अपना शासन’ नहीं था, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भरता’ थी। लोगों का यह अधिकार की वे अपने हाथों से निर्माण करें। उनका मानना था कि लोग अपनी शर्तों पर व्यापार करें और किसी की इजाजत के मोहताज न हों और गांधीजी की सोच को दिल्ली में 21 देश इसी सिद्धांत को दुनिया की अर्थव्यवस्था में शामिल करने जा रहे हैं।

अमेरिकन कंपनी एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सॉवरेन वेल्थ फंड, पब्लिक पेंशन फंड, फैमिली ऑफिस, कॉर्पोरेट लीडर्स और पॉलिसी बनाने वाले लोग एक साथ बैठेंगे और वे ब्रिक्स और इसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी निवेश और व्यापार पर मंथन करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उद्देश्य चर्चाओं को सिर्फ ऊंचे स्तर की आर्थिक थ्योरी तक सीमित न रखकर, सदस्य देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स से जुड़े जमीनी स्तर के व निवेश के लायक प्रोजेक्ट्स को सीधे ग्लोबल कैपिटल से जोड़ना है।

इस सम्मेलन के लिए दुनिया भर से 4,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, जिनमें गल्फ क्षेत्र और ब्रिक्स देशों के बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड और फैमिली ऑफिस शामिल हैं, कुल मिलाकर लगभग एक ट्रिलियन डाॅलर की संपत्ति मैनेज करते हैं। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख बिजनेस हस्तियों में सन ग्रुप के वाइस चेयरमैन शिव खेमका और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल के साथ-साथ टॉप बिजनेस लीडर्स और अहम पॉलिसी-मेकर्स शामिल हैं। यह समिट एक ऐसे अहम मोड़ पर हो रही है जब ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं बदलती ग्लोबल फाइनेंशियल व्यवस्था और बदलते ट्रेड डायनामिक्स के बीच आगे बढ़ रही हैं।

इन मुद्दों पर होगा मंथन

  1. सीमा-पार भुगतान और सेटलमेंट के लिए नए तरीकों की खोज, जिसमें पारंपरिक मुद्राओं के साथ-साथ स्थानीय मुद्राएं, स्टेबलकॉइन्स, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी और इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम शामिल हैं।

2. आर्थिक मजबूती बढ़ाने और महंगाई से सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने में तेल, बिजली, उभरते ऊर्जा सिस्टम और महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका की जांच करना।

3. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी व व्यावसायिक ढांचे के सहयोग से ब्रिक्स और सहयोगी बाजारों के बीच सामान और पूंजी की आवाजाही को आसान बनाना।

4. फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करना। भारत के बड़े पैमाने के प्लेटफॉर्म जैसे यूपीआई, आधार, डिजिलॉकर और कोविन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में टेक्नोलॉजी-आधारित गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क का काम करेंगे।

5. वैश्विक व्यापार के तरीकों में संरचनात्मक बदलावों के बीच ब्रिक्स के बढ़ते आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव का विश्लेषण करना।

 

Sumant Chaudhary