2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिलने की उठी मांग

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Delhi : 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने व उनके सेवा व अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने की मांग करते हुए शिक्षकों ने गुरुवार को दिल्ली के सभी 13 डीएम को ज्ञापन सौंपे। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, दिल्ली प्रदेश (दिल्ली अध्यापक परिषद) ने उक्त मांगों को लेकर सभी डीएम के माध्यम से पीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पालीवाल ने कहा कि टीईटी विषय पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय से प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा, उनके न्यायोचित…

Delhi : 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने व उनके सेवा व अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने की मांग करते हुए शिक्षकों ने गुरुवार को दिल्ली के सभी 13 डीएम को ज्ञापन सौंपे। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, दिल्ली प्रदेश (दिल्ली अध्यापक परिषद) ने उक्त मांगों को लेकर सभी डीएम के माध्यम से पीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार पालीवाल ने कहा कि टीईटी विषय पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय से प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा, उनके न्यायोचित अधिकारों की बहाली व उनके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से संगठन द्वारा निरंतर गंभीर एवं सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। संगठन प्रभावित शिक्षकों के साथ पूरी संवेदनशीलता व प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है व उनके न्यायोचित अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक प्रयास जारी रखेगा।

दिल्ली प्रदेश महामंत्री डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस महत्वपूर्ण अभियान में सैकड़ों शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर प्रभावित शिक्षकों के प्रति अपनी एकजुटता एवं समर्थन का परिचय दिया है। ज्ञापन के माध्यम से केन्द्र सरकार का ध्यान शिक्षकों की समस्याओं एवं चिंताओं की ओर आकर्षित करते हुए स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान व आवश्यक सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि संगठन का संकल्प है कि प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से संघर्ष एवं प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। साथ ही संगठन केंद्र सरकार से अपेक्षा करता है कि वह अपने संवैधानिक एवं विधायी अधिकारों का उपयोग कर प्रभावित शिक्षकों को न्यायसंगत राहत प्रदान करने हेतु आवश्यक निर्णय लेगी।

प्रभावित शिक्षकों को उचित संरक्षण प्रदान करने की मांग

यहां बता दें कि ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जारी टीईटी संबंधी अधिसूचना व उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के उपरांत वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका उत्पन्न हुई है। संगठन ने केन्द्र सरकार से इस विषय पर आवश्यक विधायी एवं नीतिगत हस्तक्षेप करते हुए प्रभावित शिक्षकों को उचित संरक्षण प्रदान करने की मांग की है।

संगठन ने विश्वास व्यक्त किया है कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु भारत सरकार व संवेदनशीलता, न्यायपूर्ण दृष्टिकोण एवं दूरदर्शिता का परिचय देते हुए आवश्यक निर्णय लेगी।

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Avinay