DMC पंजीकरण में महीनों की देरी से डॉक्टर परेशान, नौकरी, वेतन और विदेश में करियर पर पड़ रहा असर

Summary :

Delhi : दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) के विवादास्पद चुनाव के बाद इसके कार्य शुरू नहीं होने के कारण डॉक्टरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और गुड-स्टैंडिंग सर्टिफिकेट जारी होने में हो रही लंबी देरी से बड़ी संख्या में डॉक्टरों का पेशेवर भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई डॉक्टरों का दावा है कि जिन प्रक्रियाओं में पहले कुछ दिन या सप्ताह लगते थे, अब उनमें तीन से छह महीने तक का समय लग रहा है। इसका असर सरकारी नौकरी, वेतन, उच्च शिक्षा और विदेश में रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।…

Delhi : दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) के विवादास्पद चुनाव के बाद इसके कार्य शुरू नहीं होने के कारण डॉक्टरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और गुड-स्टैंडिंग सर्टिफिकेट जारी होने में हो रही लंबी देरी से बड़ी संख्या में डॉक्टरों का पेशेवर भविष्य प्रभावित हो रहा है।

कई डॉक्टरों का दावा है कि जिन प्रक्रियाओं में पहले कुछ दिन या सप्ताह लगते थे, अब उनमें तीन से छह महीने तक का समय लग रहा है। इसका असर सरकारी नौकरी, वेतन, उच्च शिक्षा और विदेश में रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है। इंगलैंड में कार्यरत डॉ. अनुजा कौशिक (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनका डीएमए सत्यापन पिछले लगभग छह महीने से लंबित है।

समय पर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें विदेश में नौकरी का अवसर गंवाना पड़ा। उनका कहना है कि इससे उनके करियर, वीजा और भविष्य की योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक जूनियर डॉक्टर ने बताया कि दस्तावेजों का सत्यापन 6 मई को पूरा हो गया था और 20 दिनों में पंजीकरण संख्या जारी करने का आश्वासन मिला था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ। पंजीकरण संख्या नहीं मिलने के कारण उनका वेतन रुका हुआ है और उन्हें मरीजों के उपचार के दौरान अपने वरिष्ठ चिकित्सक की मुहर का सहारा लेना पड़ रहा है।

एलोपैथिक चिकित्सा करने वाले सभी डॉक्टरों के लिए डीएमए पंजीकरण अनिवार्य

बता दें कि दिल्ली में एलोपैथिक चिकित्सा करने वाले सभी डॉक्टरों के लिए डीएमसी पंजीकरण अनिवार्य है। यही पंजीकरण सरकारी नियुक्ति, वेतन, उच्च शिक्षा, अंतरराज्यीय तबादले और विदेश में चिकित्सा पंजीकरण के लिए आवश्यक होता है। डीएमसी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि जून 2025 में परिषद भंग होने के बाद से प्रशासनिक अस्थिरता, पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की कमी और अनुमोदन प्रक्रिया में बाधाओं के कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं।

वहीं पूर्व अध्यक्ष डॉ. अश्विनी डालमिया ने भी स्वीकार किया कि प्रशासनिक बदलावों और विभिन्न संस्थानों से होने वाले सत्यापन में लगने वाले समय के कारण देरी बढ़ी है। हाल ही में संपन्न डीएमसी चुनावों के बाद लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की मांग तेज हो गई है।

यह भी पढ़ें : रंगदारी न देने पर बिल्डर पर फायरिंग, मुठभेड़ के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

 

Avinay