अस्पताल की आड़ में नवजातों का सौदा, 8 लाख रुपये तक में बिक रहे थे मासूम

Summary :

Delhi : सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ की टीम ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह एक निजी अस्पताल की आड़ में मासूम बच्चों का सौदा करता था। पुलिस ने अस्पताल की संचालिका महिला डॉक्टर समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अस्पताल मालिक डॉ. विवेकी (47), ज्योति उर्फ कमलेश (37), शालू (43), ललित (38), प्रतिभा (34), विपिन (33), ओमवती (45), साएबा भाई घमर उर्फ कालिया, बच्चा खरीदने वाले दंपती, मुकेश और रीमा, सन्नी अरोड़ा और रितु…

Delhi : सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ की टीम ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह एक निजी अस्पताल की आड़ में मासूम बच्चों का सौदा करता था। पुलिस ने अस्पताल की संचालिका महिला डॉक्टर समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान अस्पताल मालिक डॉ. विवेकी (47), ज्योति उर्फ कमलेश (37), शालू (43), ललित (38), प्रतिभा (34), विपिन (33), ओमवती (45), साएबा भाई घमर उर्फ कालिया, बच्चा खरीदने वाले दंपती, मुकेश और रीमा, सन्नी अरोड़ा और रितु अरोड़ा और बच्चा खरीदने वाली एक और महिला सरिका के रूप में हुई है।

डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि आरोपियों को एसीपी पदम सिंह राणा की देखरेख में इंस्पेक्टर संदीप यादव के नेतृत्व में महिला सब इंस्पेक्टर प्रगति, यामिनी वत्स सहित अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने पकड़ा है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को खरीदकर दिल्ली लाता था। रोहिणी के एक अस्पताल में उनके फर्जी दस्तावेज बनाकर 5 से 8 लाख रुपये में बेचा जाता था। डेढ़ साल में करीब 30 बच्चों की बिक्री की आशंका है। पांच बच्चों को बरामद कर शेल्टर होम भेजा गया है।

20 हजार की टोकन मनी से खुला नवजात तस्करी का राज

डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में पुलिस को सूचना मिली थी कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला बार-बार अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ दिखाई देती है। शक होने पर पुलिस ने निगरानी शुरू की और एक महिला पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर गिरोह तक पहुंचाया, जब नकली ग्राहक ने बच्चा खरीदने की इच्छा जताई तो पहले आरोपियों ने मना किया, लेकिन बाद में सौदा करने को तैयार हो गए।

20 हजार रुपये टोकन मनी देने के बाद 5 जून को नवजात बच्चा सौंपते ही पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को दबोच लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे रैकेट का संचालन बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल से हो रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर अस्पताल संचालक डॉ. विवेकी, लैब टेक्नीशियन प्रतिभा और चालक विपिन को गिरफ्तार किया।

जांच में सामने आया कि राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से 10 से 15 हजार रुपये में नवजात खरीदे जाते थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली लाकर अस्पताल में रखा जाता और लड़कियों को 4 से 5 लाख तथा लड़कों को 8 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, डॉ. विवेकी और साएबा भाई घमर उर्फ कालिया इस गिरोह के मास्टरमाइंड हैं।

9 लाख में खरीदे ‘जुड़वा’ बच्चे, जांच में खुला बड़ा झूठ

नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त मामले की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान गिरोह 30 नवजात बच्चों की बिक्री कर चुका हो सकता है। आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में छापेमारी कर मुकेश पाल और उसकी पत्नी रीमा पाल को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि दंपती ने गिरोह से 9 लाख रुपये में एक लड़का और एक लड़की खरीदी थी।

आरोपियों ने दोनों बच्चों को जुड़वा भाई-बहन बताकर बेचा था, लेकिन जांच में सामने आया कि दोनों बच्चे अलग-अलग परिवारों के थे और जुड़वा नहीं थे। इसके अलावा पुलिस ने हरियाणा के पानीपत से सन्नी अरोड़ा, उसकी पत्नी रितु अरोड़ा और सरिका नामक महिला को भी गिरफ्तार किया। इन पांचों आरोपियों के कब्जे से चार नवजात बच्चों को बरामद किया गया है। पुलिस बच्चों के असली परिजनों का पता लगाने और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

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