Delhi News : साइबर ठगों के ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसी एक बुजुर्ग महिला की जिंदगीभर की जमा-पूंजी दिल्ली पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बच गई। आईएफएसओ की 1930 हेल्पलाइन पर मिली सूचना के बाद पुलिस टीम ने महज एक संदिग्ध खाते की जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि ट्रांजैक्शन की दूसरी और तीसरी लेयर तक पहुंचकर एक ऐसे दूसरे संभावित पीड़ित का पता लगा लिया, जो ठगों के दबाव में अपनी रकम गंवाने वाली थी।
पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई के चलते महिला को आगे रकम ट्रांसफर करने से रोक लिया गया। एडिशनल सीपी संजय भाटिया के मुताबिक, पुलिस को ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़ी एक कॉल मिली थी। 1930 हेल्पलाइन स्टाफ ने तुरंत उस बैंक खाते की जांच शुरू की, जिसमें ठगी की रकम भेजी गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने ट्रांजैक्शन की आगे की कड़ियों को खंगाला तो पता चला कि उसी समय उस संदिग्ध खाते में किसी दूसरे स्रोत से भी रकम आई थी। इससे पुलिस को आशंका हुई कि साइबर ठग एक साथ कई लोगों को निशाना बना रहे हैं।
पुलिस ने संबंधित बैंक से संपर्क कर रकम भेजने वाले की जानकारी और मोबाइल नंबर हासिल किया। इसके बाद इंस्पेक्टर प्रवीण ने बुजुर्ग महिला को फोन किया। महिला बेहद घबराई हुई थी और ठगों की बातों में आकर यह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ क्या हो रहा है। इंस्पेक्टर प्रवीण ने धैर्यपूर्वक उसे पूरी स्थिति समझाई और भरोसा दिलाया कि वह असली पुलिस अधिकारी से बात कर रही है। महिला पहले ही कुछ रकम ठगों के खाते में भेज चुकी थी। वह और रकम देने के लिए अपना म्यूचुअल फंड तक लिक्विडेट करने की तैयारी में थी।
आईएफएसओ ने बिना समय गंवाए जनकपुरी थाना पुलिस को सूचना दी। बीट कांस्टेबल आर.के. मीणा तत्काल महिला के घर पहुंचे और उसे आगे कोई पैसा ट्रांसफर नहीं करने की सलाह दी। परिवार से बातचीत के बाद महिला को पूरा मामला समझ आया और उसने आगे रकम भेजने से खुद को रोक लिया।


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