DU MA History Syllabus : दिल्ली यूनिवर्सिटी में MA इतिहास के सिलेबस में किए गए बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगस्त में अधिसूचित पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर से कई पुराने और चर्चित विषयों को बाहर रखा गया है। इनमें सबसे प्रमुख ‘द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मीडीवल नॉर्थ इंडिया’ जैसा कोर पेपर है, जो लंबे समय से पढ़ाया जा रहा था।
इसके अलावा प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति, उत्तर भारत के इतिहास और राजनीतिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई इलेक्टिव विषयों को भी जारी की गई सूची में जगह नहीं मिली है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि पाठ्यक्रमों को रोका नहीं गया है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी के पास भेजा गया है।
इसके अलावा यह भी शामिल
हटाए गए विषयों में मध्यकालीन उत्तर भारत का इतिहास (1400-1550 ईस्वी), प्राचीन भारत में जेंडर व महिला (1500 ईसा पूर्व से 1000 ईस्वी), और प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज जैसे अहम पेपर्स शामिल हैं। ये विषय छात्रों को उस दौर की शासन व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक बदलावों और सत्ता के गठन की गहरी समझ देते थे।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इतिहास विभाग ने कुल 38 इलेक्टिव (DSE) पेपर्स का प्रस्ताव दिया था, लेकिन फिलहाल तीसरे सेमेस्टर के नोटिफाइड सिलेबस में केवल 16 पेपर्स को ही शामिल किया गया है।
कुछ विषयों को जोड़ने की उम्मीद
विवाद पर डीयू की डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स के. रत्नाबली का कहना है कि किसी भी कोर्स को हमेशा के लिए बंद नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद विभाग ने कुछ पाठ्यक्रमों की यूनिट्स, रीडिंग्स और पेपर्स में बदलाव कर दिए थे।
इस वजह से एकेडमिक काउंसिल के फैसले के बाद कुलपति ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया। समीक्षा पूरी होने के बाद कुछ और विषयों को सिलेबस में जोड़े जाने की उम्मीद है।
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