भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की फिर भर्ती? अग्निवीर योजना को लेकर बढ़ी चर्चा पोखरा में उठी भर्ती शुरू करने की मांग

Summary :

नेपाल के पोखरा शहर में भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में पूर्व गोरखा सैनिकों, उनके परिवारों और नेपाली युवाओं ने अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इंडियन आर्मी में गोरखा युवाओं की भर्ती काफी सालों से रोक दी गई हुई है .

नेपाल के पोखरा शहर में भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में पूर्व गोरखा सैनिकों, उनके परिवारों और नेपाली युवाओं ने अपनी आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इंडियन आर्मी में गोरखा युवाओं की भर्ती काफी सालों से रोक दी गई हुई है, जिससे रोजगार मिलना बंद हो गया है। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कास्की जिला प्रशासन के अधिकारियों को एक ज्ञापन देकर केंद्र सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का काम किया।

अग्निवीर योजना के तहत भर्ती की मांग

Nepal Agnipath recruitment protest (CREDIT-SM)

बता दें कि यह प्रदर्शन भारतीय एक्स-सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेड नेपाल, पोखरा की तरफ से आयोजित किया गया था। इस संगठन ने केंद्र सरकार के सामने दो सबसे खास मांगें रखीं। पहली मांग भारतीय सेना में नेपाली युवाओं को फिर से मौका दिया जाए। दूसरी मांग उन पूर्व सैनिक संगठनों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण से जुड़ी है, जिनके नाम में ‘सैनिक’ या ‘एक्स-सर्विसमेन’ जैसे शब्द शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन संगठनों के जरिए पूर्व सैनिक सरकार के सामने अपनी समस्याएं और अधिकार रख पाते हैं।

कोरोना के बाद अग्निपथ योजना भारत में शुरू

मालूम हो कि भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में नेपाली नागरिकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू में कोविड-19 महामारी के कारण रोक दी गई थी। भारत में ‘अग्निवीर’ योजना लागू होने के बाद यह मामला और भी जटिल हो गया। इसके तहत ‘अग्निवीर’ के तौर पर चार साल की सेवा अवधि होती है; इस अवधि को पूरा करने के बाद चुने गए कुछ ही लोगों को सेना में आगे नौकारी करने का मौका मिलता है, जबकि बाकी लोगों को एक तय वित्तीय पैकेज के साथ सेवा से हटाने की प्लानिंग है। नेपाल ने पहले भी इस व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं, और इसी वजह से नेपाली युवाओं की भर्ती की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

सेना प्रमुख के नेपाल दौरे से पहले चर्चा शुरू

Indian Army Chief General Dheeraj Seth (CREDIT-SM)

इस बीच खबर है कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 अगस्त से नेपाल दौरे पर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका दौरा पहले से ही तय है। इस बीच, यह घोषणा की गई है कि भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच चली आ रही पुरानी परंपरा के तहत उन्हें नेपाली सेना के जनरल का मानद पद दिया जाएगा। इस समय गोरखा भर्ती का मुद्दा फिर से उठने के कारण इस मामला और चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और आगे बढ़ाएंगे।

भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट का इतिहास

भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट का इतिहास नेपाल और अंग्रेजों के बीच हुए एंग्लो-नेपाली युद्ध (1814–1816) से जुड़ा है। इस युद्ध के दौरान गोरखा सैनिकों के अदम्य साहस से प्रभावित होकर, ईस्ट इंडिया कंपनी ने 24 अप्रैल 1815 को पहली गोरखा बटालियन बनाई। 1947 में आजादी के बाद, एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत भारत को छह रेजिमेंट मिलीं।

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।