Dwarka Golf Course Tragedy: द्वारका सेक्टर-24 स्थित डीडीए गोल्फ कोर्स में हुए दर्दनाक हादसे ने सुरक्षा इंतजामों की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। पेड़ और दीवार फांदकर अंदर पहुंचे तीन मासूमों की तालाब में डूबने से मौत ने पूरे इलाके को गम और गुस्से में डुबो दिया। गुरुवार को घटनास्थल पर सन्नाटा, आंसू और आक्रोश एक साथ नजर आया। तालाब किनारे खड़े लोग उस जगह को टकटकी लगाकर देखते रहे, जहां कुछ घंटे पहले तक मासूम जिंदगियां मौजूद थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चारदीवारी होने के बावजूद निगरानी की भारी कमी है। उनका मानना है कि केवल दीवार खड़ी कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि हर संवेदनशील हिस्से पर लगातार नजर रखना भी उतना ही जरूरी है।
सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चे किसी पेड़ या कमजोर हिस्से के सहारे अंदर पहुंचे होंगे। यह पहलू सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बीच एक ही सवाल बार-बार उठता रहा क्या मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होती तो यह हादसा टल सकता था? कई लोगों ने आरोप लगाया कि गोल्फ कोर्स जैसे बड़े परिसर में नियमित गश्त और पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी जगहों पर लापरवाही सीधे जानलेवा साबित हो सकती है। दिनभर पुलिस और प्रशासनिक टीमें मौके पर डटी रहीं।
पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को शांत करने में लगे रहे, जबकि जांच टीम ने साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। आसपास के निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन समय बीतने के साथ सुरक्षा को लेकर सख्ती ढीली पड़ जाती है। उधर,दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बयान जारी कर घटना को बेहद दुखद बताया है। प्राधिकरण ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए जांच के लिए निदेशक की अगुवाई में तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जिसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सुरक्षा में चूक या बड़ी लापरवाही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि द्वारका में बने इस गोल्फ कोर्स को चारों ओर से करीब 5-6 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल से घेरा गया है। परिसर के पास एक गार्ड रूम भी मौजूद है, जहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बताई जाती है। इसके बावजूद बड़ा सवाल यह है कि सुबह के समय बच्चे तालाब तक पहुंचकर नहाने कैसे लगे। क्या उन्होंने आसानी से दीवार पार कर ली, या सुरक्षा व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक रही? अगर बच्चे अंदर पहुंचे, तो उस वक्त गार्ड कहां थे और उन्होंने रोकने की कोशिश क्यों नहीं की? यह घटना साफ तौर पर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करती है और जिम्मेदार एजेंसियों की लापरवाही की ओर इशारा करती है।
गोल्फ कोर्स के तालाब पहली भी निगली तीन जिंदगियां
गौरतलब है कि तीन साल पहले साल 2023 में द्वारका सेक्टर-23 स्थित निर्माणाधीन गोल्फ कोर्स में बने पानी से भरे गड्ढे ने तीन युवकों की जान ले ली थी। जानकारी के मुताबिक, अरुण, अनुज और अभिषेक अपने एक अन्य साथी के साथ दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए थे। इसी दौरान वे गहरे पानी में उतर गए और बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तीनों मृतक कुतुब विहार के निवासी थे और उनकी उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच बताई गई। इस घटना ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी और लापरवाही को उजागर कर दिया।
हादसे के बाद रोता-बिलाखता परिवार
द्वारका सेक्टर-24 स्थित डीडीए गोल्फ कोर्स के तालाब में डूबने से दो सगे भाइयों वीर और रवि समेत हर्ष की दर्दनाक मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया। हादसे के बाद घर में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वीर और रवि के माता-पिता सदमे में हैं और बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनके बच्चों के साथ ऐसा कैसे हो गया। आसपास के लोग भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन किसी के पास इस दुख का जवाब नहीं है। हर्ष के परिजन भी गहरे आघात में हैं और अपने लाडले को याद कर बिलख उठते हैं। बच्चों की अचानक हुई मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है। हर आंख नम है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध नजर आ रहा है।
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