कैंसर की नकली दवाओं का भंडाफोड़, दिल्ली-मुंबई तक की गई छापेमारी से तस्करों में हड़कंप

Summary :

Big Scam Of Fake Cancer Medicines Exposed : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इंटर स्टेट सेल ने नकली और अस्पतालों से अवैध तरीके से निकाली गई महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क के अब तक 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनके ठिकानों से करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की दवाएं, 50 लाख रुपये नकद और पैकिंग से जुड़ा सामान बरामद किया गया है। डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम ने बताया कि एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में…

Big Scam Of Fake Cancer Medicines Exposed : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इंटर स्टेट सेल ने नकली और अस्पतालों से अवैध तरीके से निकाली गई महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क के अब तक 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनके ठिकानों से करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की दवाएं, 50 लाख रुपये नकद और पैकिंग से जुड़ा सामान बरामद किया गया है।

डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम ने बताया कि एसीपी रमेश लांबा की देखरेख में इंस्पेक्टर कमल कुमार के नेतृत्व की टीम ने यह कार्रवाई की है। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के अलावा मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला था। क्राइम ब्रांच ने 11 जुलाई को दिल्ली और नवी मुंबई में सात टीमों के जरिए एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई में दार्ज़लेक्स, इम्फ़िनज़ी, एर्बिटक्स, ओपडीटा, गाज़ीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी एंटी-कैंसर दवाएं बरामद हुईं

तीन तरीकों से जुटाते थे दवाएं

पुलिस की जांच के मुताबिक आरोपी तीन तरीकों से दवाओं का इंतजाम करते थे। पहला, अनधिकृत स्रोतों से नकली दवाएं खरीदना। दूसरा, अस्पतालों से कैंसर मरीजों के लिए आई असली दवाओं को कथित तौर पर चोरी या डायवर्ट करना और तीसरा, सरकारी अस्पतालों व गोदामों में भेजी गई दवाओं को अवैध तरीके से बाहर निकालना। आरोपी दवाओं की खरीद-बिक्री बिना वैध बिल, लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों के करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि दवाओं के पुराने कार्टून और खाली बॉक्स संभालकर रखे जाते थे और बाद में उन्हीं का इस्तेमाल पैकिंग में किया जाता था। बैच नंबर और एमआरपी जैसी पहचान मिटाने के लिए कथित तौर पर एसीटोन जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद दवाओं को थर्मोकोल, बबल रैप और टेप से पैक कर अलग-अलग शहरों में भेजा जाता था।

अस्पताल के कर्मचारी भी नेटवर्क में शामिल

क्राइम ब्रांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में मेडिकल स्टोर संचालक, दवा कारोबारी, बिचौलिए और अस्पताल के कर्मचारी शामिल हैं। हैदराबाद और हरियाणा से जुड़े नेटवर्क में अस्पतालों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों पर मरीजों के लिए रखी एंटी-कैंसर दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकालकर सप्लाई करने का आरोप है। एक अस्पताल की ऑन्कोलॉजी यूनिट में नर्सिंग इंचार्ज के तौर पर काम करने वाले आरोपी पर भी दवाएं बाहर निकालने का आरोप है।

Sumant Chaudhary